प्रभात खबर ने बनाया अपने पाठकों को महामूर्ख, अधिमास महीने में भी विवाह के शुभ मुहूर्त दिये गिना, जिस दिन विवाह के लग्न नहीं, उस दिन भी विवाह के लग्न दिये बना
अपने स्वभाव के अनुकूल एक बार फिर प्रभात खबर ने अपने पाठकों को महामूर्ख बनाया है। प्रभात खबर ने अधिमास महीने में भी विवाह के शुभ मुहूर्त अपने पाठकों को बता दिये हैं। यही नहीं इस अखबार ने उस दिन भी विवाह के लग्न बना दिये हैं, जिस दिन विवाह के लग्न ही नहीं हैं। पंचाग के जानकारों के अनुसार, चूंकि महामूर्खों का जमाना है। पत्रकार भी महामूर्ख, अखबार भी महामूर्ख और आजकल बाजार में पंडितों का समूह भी महामूर्ख आ धमका है, ऐसे में महामूर्ख बनने से अब पाठक भी नहीं बच सकते।
पंचांग के जानकार बताते हैं कि चूंकि अब अखबारों के संपादक भी महामूर्खों की श्रेणी में आने को बेताब हैं। इसलिए ऐसे-ऐसे समाचारों के छपने से अब उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होता, बल्कि हमलोग इसे पढ़कर आनन्द लेते हैं, परमानन्द की प्राप्ति करते हैं, यह सोचकर की धन्य हैं वे लेखनहार, धन्य है वे छापनहार, जिनकी कृपा से पूरी रांची अंधकारमय वातावरण की ओर बढ़ती चली जा रही है।
पंचांग के जानकार तो यह भी कहते हैं कि कई बार विद्रोही24 ने इन अखबारों की गलतियों को प्रकाशित किया, पर इन पर कोई असर पड़ा। उतर होगा – नहीं। दरअसल ये सुधरनेवाले ही नहीं हैं। इन्होंने संकल्प ले रखा है कि जब तक एक-एक व्यक्ति को अपनी मूर्खता का भान नहीं करा देंगे, चैन से नहीं बैठेंगे।
अब जरा देखिये। कल का यानी 12.04.2026 का प्रभात खबर। पृष्ठ संख्या 11, अखबार ने सबसे उपर एक खबर छापी है। खबर की हेडिंग है – 16 अप्रैल से बजेंगी शहनाइयां, जुलाई मध्य तक 35 से अधिक शुभ मुहूर्त। इसी में बॉक्स देकर अखबार ने विवाह के प्रमुख शुभ मुहूर्त दिये हैं।

लिखा है। अप्रैल महीने में 16, 18, 19, 20, 21, 22, 25, 26 और 29 को विवाह का शुभ मुहूर्त है। जबकि सच्चाई यह है कि 18, 19 और 22 अप्रैल को लग्न ही नहीं हैं। इसी प्रकार इस अखबार ने मई महीने में 1, 3, 4, 8, 9, 10, 15, 16, 17, 21, 22 और 23 को विवाह का शुभ मुहूर्त बताया है। जबकि सच्चाई यह है कि मई महीने में 10, 15, 16, 17, 21, 22, 23 को लग्न ही नहीं हैं।
अब जून देखिये अखबार ने लिखा है कि जून महीने में 2, 3, 4, 5, 11, 12, 14, 23, 24, 30 को विवाह का शुभ मुहूर्त है। जबकि सच्चाई यह है कि 17 मई से लेकर 15 जून तक ज्येष्ठ मास में अधिमास लगा हुआ है, जिसे मलमास कहा जाता है और पूरी दुनिया जानती है, जो सनातन या वैदिक धर्म के अनुयायी है। वे अच्छी तरह जानते है कि इस अधिमास या मलमास में कोई शादी-विवाह नहीं होता, कोई मांगलिक कार्य नहीं होते, तो ऐसे में प्रभात खबर ही बताये कि 17 मई से लेकर 15 जून के बीच में उसने विवाह का शुभ मुहूर्त कैसे निकाल दिया?
पंचाग देखें तो पंचाग साफ लिखता है कि 11 जुलाई को ही अंतिम शुभ वैवाहिक मुहूर्त है। उसके बाद ‘मासान्त गुरुवार्थक्यादि दोषः सत्वात् विवाह मुहूर्ताभावः’ हो जाता है, तो प्रभात खबर 15 जुलाई को अंतिम मुहूर्त कैसे करार दे दिया? आश्चर्य यह भी है कि प्रभात खबर 5 जुलाई को भी वैवाहिक मुहूर्त बताया है, जबकि 5 जुलाई को विवाह का नक्षत्र ही नहीं हैं।
अब सवाल उठता है कि जिस चीज की प्रभात खबर को जानकारी नहीं हैं। उस चीज में ये अखबार टांग क्यों अड़ाता है? क्यों गलत जानकारी देता है? क्या जरुरत है लोगों को अंट-शंट बताकर दिमाग खराब करने की? अंत में हे प्रभात खबर के पाठकों, थोड़ा स्वयं को संभालिये, ये जो आपके दिमाग में बैठा है कि प्रभात खबर बहुत ही शानदार अखबार है। इसे अपने दिमाग से निकालिये। ये विशुद्ध वणिक है। इसका प्रमुख कार्य येन-केन प्रकारेन धन अर्जित करना है, न कि आपका बौद्धिक या मानसिक विकास करना। इसलिए इनके बेतुके समाचारों पर विश्वास न करें। इससे अच्छा रहेगा कि आपके आस-पास जो सामान्य पंडितों की जमात है। उनसे संपर्क करें, ज्यादा अच्छा रहेगा।
