सब जानत प्रभु प्रभुता सोई, तदपि कहे बिनु रहा न कोई … तपोवन स्थित श्रीराम दरबार सपत्नीक पहुंचे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, पूजा अर्चना कर सभी के मंगलमय जीवन के लिए प्रार्थना की
आज पता नहीं क्यों? भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त गोस्वामी तुलसीदास की कालजयी रचना से कुछ चौपाई चुराने का मन कर रहा है। गोस्वामी तुलसीदास स्वयं को श्रीरामरूपी सागर में डूबोकर कहते हैं –
सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहे बिनु रहा न कोई।।
सीता राम चरित अति पावन। मधुर सरस अरु अति मनभावन।।
श्रीराम कथा और रामायण के बारे में फ्रांस के महान साहित्यकार मिसलेट कहते है कि जिसे जीवन की अनुभूतियों की प्यास हो। वो इस महाकाव्य सरोवर रूपी जल से अपनी प्यास बुझाए, जो सागर से भी विशाल है। जिसमें सूर्य का प्रकाश है। जिसमें एक निरन्तर शांति एक अनन्त मिठास है। भारत में जो जन्मा है और जिसे राम से प्रेम नहीं हैं। भला उसे मुक्ति कैसे मिल सकती है। कबीर तो साफ कहते है कि –
कस्तुरी कुंडलि बसै, मृग ढंढू बन माहि। ऐसे घटि-घटि राम है, दुनिया देखे नाहि।।
संपूर्ण विश्व के कई विद्वानों, मणीषियों, ऋषियों-महर्षियों, कवियों-राजनीतिज्ञों ने विभिन्न भावों से राम को देखने की कोशिश की और जिसने जैसे राम को देखा, राम उन्हें वैसे ही दीखे। तभी तो गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा -जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरति दीखै तिन तैसी।।
और अब झारखण्ड की बात। कुछ दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने विधानसभा में कुछ धार्मिक क्रियाकलापों को लेकर टिप्पणियां की थी। जिसे जो लगा, वो उनकी बातों को सुनकर वैसी टिप्पणी कर दी। लेकिन जो हेमन्त सोरेन को जानते हैं। उनके हृदय के भाव को जानते हैं कि वे अंदर से कितने धार्मिक और कैसा भाव रखते हैं? अच्छी तरह जानते हैं। अब जरा आज ही देखिये। आज राम नवमी थी और नवरात्र का अंतिम दिन।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ, सुबह-सुबह पहुंच गये, मुख्यमंत्री आवास में ही स्थापित हनुमान मंदिर में। वहां महावीर पताका को प्रतिष्ठित किया। हनुमान जी की स्वयं आरती उतारी। उन्हें भोग लगाया। कुछ देर मंदिर में बिताई।

वहीं दुर्गा मंदिर में भी कुछ देर बैठकर प्रार्थनाएं की। सब का मंगलमय हो। राज्य प्रगति की ओर अग्रसर हो। मन में यह सुंदर भाव रखा और फिर चल पड़े। रांची के एतिहासिक मंदिर तपोवन मंदिर की ओर।

तपोवन मंदिर पहुंचते ही उन्होंने रामदरबार में अपना सर झुकाया। उनके साथ इस अवसर पर उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी थी। उन्होंने भी भगवान श्रीराम के चरणों में नतमस्तक होकर सभी के लिए यह वर्ष मंगलकारी हो। उसके लिए विशेष प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पूजनोपरांत कहा कि रामनवमी महापर्व के अवसर पर रांची के श्री राम जानकी तपोवन मंदिर में हर वर्ष की भांति इस बार भी आस्था के समागम में शामिल होने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है। आज यहां पूजा अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। विभिन्न अखाड़ों की शोभायात्रा का आज यहां समागम भी हो रहा है। ऐसे में पूरी श्रद्धा, उमंग, उत्साह और खुशी के साथ इस पर्व को मनाते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और सामाजिक सद्भाव और समरसता के साथ रामनवमी महापर्व को ऐतिहासिक और यादगार बनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तपोवन मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। इसकी एक अलग पहचान है। अब इसी पहचान को और मजबूत बनाने की दिशा में उन्होंने कदम बढ़ा दिया है। मंदिर के सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। हम सभी भगवान श्री राम से कामना करें कि इस मंदिर को भव्यता देने का काम जल्द से जल्द पूर्ण हो।
