सदन में CM हेमन्त ने ठोका ताल, कहा – वित्तीय प्रबंधन में 2018 में हम 13वें और आज तीसरे स्थान पर पहुंच गये, वो भी विपरीत परिस्थितियों में, इसलिए हमने कहा कि हम जो कहते हैं, वो करते हैं
झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सदन में कहा कि पिछले छह सालों में हमारी झामुमो गठबंधन सरकार ने कई चुनौतियां देखी हैं। उसका सामना किया। झारखण्ड में डबल इंजन की सरकार नहीं, बल्कि सिंगल इंजन की सरकार है, फिर भी हम किस प्रकार से सामाजिक सौहार्द के साथ छह सालों में झारखण्ड को गढ़ा है, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर रहे है, वो भी बात किसी से छुपा नहीं हैं। सभी जानते हैं। लेकिन जब इनकी सरकार थी तो क्या हाल था, सदन में कई बार चर्चा में आया भी है। आज राज्य शांत और सौहार्द वातावरण में चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि अगर दृष्टि स्पष्ट और संकल्प दृढ़ हो तो सीमित साधनों में कई चीजें ऐसी हैं तो असंभव को भी संभव बना देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सदन केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बहस की ही जगह नहीं, बल्कि राज्य की दशा और दिशा को भी तय करता है। खासकर बजट सत्र तो और महत्वपूर्ण होता है। राज्य की जनता की इस पर नजर रहती है। इस सत्र के माध्यम से बहुत सारी बातें हुई। कई विचार आये। सुझाव आये। आलोचना भी हुई और आरोप भी लगा। निश्चित रूप से विपक्ष की भी भूमिका बहुत बड़ी है। हम विपक्ष को भी इस सदन के अभिन्न अंग के रूप में देखते हैं।
उन्होंने कहा कि आज इजराइल और अमेरिका ताबड़तोड़ ईरान पर हमले कर रहे हैं। ईरान का एक जहाज भारत आया था और भारत के इलाके में ही उस जहाज पर अमेरिका हमला करता है। लेकिन झारखण्ड के लोग इतने कमजोर नहीं, वे जवाब देना जानते हैं। पहले तो आदिवासियों मूलवासियों के नाम पर हमें हेय दृष्टि से देखा गया और जब हमारी आवाज मजबूत हुई तो इन्हें दिक्कते आने लगी। उन्होंने कहा कि वे बता देना चाहते है कि हम अंग्रेजों से लोहा लिये हैं, ऐसे में सामंती विचारधारा के लोगों से लोहा लेने में हमें क्या दिक्कत होगी?
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सदन में कहा गया कि असम के आदिवासियों की चर्चा झारखण्ड विधानसभा में क्यों? हम बता देना चाहते है कि आदिवासी चाहे असम में हो या मणिपुर या किसी अन्य जगह। उन पर अत्याचार कही होगा, तो झारखण्ड की आवाज वहां तक जायेगी, क्योंकि वे आदिवासी महसूस करते हैं कि उन पर कुछ आंच आयेगी तो और कही से नहीं, लेकिन झारखण्ड तो उनका दर्द अवश्य महसूस करेगा।
उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों के लिए उन्होंने प्रवासी झारखण्ड फाउंडेशन का गठन करने का फैसला लिया है। यह भारत के सभी राज्यों में खुलेगा, जहां प्रवासी आदिवासियों की संख्या अधिक है। कुछ राज्यों में तो ये काम भी कर रहा है। इसमें विपक्ष का क्या रोल रहेगा, ये तो भविष्य ही बतायेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा झारखण्ड के श्रमिकों की जीवन रेखा है। हमलोगों ने इसे लेकर आज एक प्रस्ताव भी पारित किया है। सच्चाई यह भी है कि हमारे हक के मनरेगा का हजारों करोड़ रुपया केन्द्र के पास बकाया है। वह भी हमें नहीं दिया जा रहा। हमें लग रहा है कि ऐसी स्थितियां रहेगी तो फिर से हमें पलायन व कुपोषण का दंश न झेलना पड़े। केन्द्र अपनी जिम्मेवारी कितना समझ रहा है, वो सबके सामने हैं।
उन्होंने कहा कि देश आज एलपीजी संकट से जूझ रहा है। केन्द्र इसकी जिम्मेवारी भी हमें देना चाह रहा है। वे कह रहे है कि एलपीजी गैस हम आपको दे रहे हैं, कैसे बांटना है, आप जानिये। मतलब ऐसी स्थिति में जब वे जानते है कि एलपीजी गैस बांटना कितना संकट से भरा है। ये नकारे लोग, इसका बोझ भी हम पर देना चाहते है, ताकि जब हम इसमें नकारा हो जाये, तो जनता की जूता उन पर न पड़कर, हमारे उपर पड़े। जबकि एलपीजी गैस बांटना केन्द्र का काम है।
उन्होंने कहा कि हर नागरिक की सामाजिक सुरक्षा, हर घर को भोजन, बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर शिक्षा हर सरकार का मूल धर्म होता है। विपक्ष आलोचना करता है। उसका आलोचना करने का अधिकार भी है। लेकिन पिछले चुनाव 2019 में उस समय क्या हाल था। इनकी हरकतों को जनता देखी है। तभी तो इन्हें विपक्ष में लाकर रख दी। आज तो झारखण्ड सरकार के कार्यों की चर्चाएं राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी है। सरकार के कार्यों को लेकर विभिन्न अखबारों-सोशल मीडिया में भी चर्चाएं होने लगी है।
उन्होंने कहा कि आज से छह साल पहले झारखण्ड का बजट 86 हजार करोड़ रुपये था और आज एक लाख 58 हजार करोड़ हो गया। ये हमारे लिए केवल आकड़ा नहीं, बल्कि ये हमारे बेहतर प्रबंधन का नतीजा है। इससे आत्मबल को बल मिलता है। इसी आत्मविश्वास के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारे वित्तीय प्रबंधन को नीति आयोग भी समर्थन करता है। इसे बेहतर वित्तीय प्रबंधन मानता है। जहां 2018 में हम 13वें स्थान पर थे। आज हम तीसरे स्थान पर है। इतनी तेजी से विपरीत परिस्थिति में भी चीजों को एक मुकाम पर पहुंचाना कितना चुनौतीपूर्ण होता है और खासकर उस राज्य में जहां लोग कृषि पर आधारित जीवन जीते हो। इसलिए हमने कहा कि हम जो कहते हैं, वो करते हैं। झारखण्ड झुका नहीं, रुका नहीं, आगे बढ़ता रहा।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आने के पहले 12 लाख लोगों को पेंशन मिलता था। लेकिन आज क्या स्थिति है? आज सर्वजन पेंशन योजना के तहत 35 लाख से अधिक लोगों को पेंशन मिल रहे हैं। महिला सशक्तिकरण को लेकर भी पूरे देश में झारखण्ड की चर्चा हो रही है। मंईयां योजना को लोग मिसाल के रुप में ले रहे हैं। लगभग 50 लाख से अधिक महिलाओं को इसमें जोड़ा गया है और 30 करोड़ की राशि इनके खातों में भेजा भी जा चुका है। सच में इसे ही राजनीति कहते हैं, यानी जिनके लिए आप काम कर रहे हैं, उनको आप कितना लाभान्वित कर रहे हैं, सेवा दे रहे हैं। सही में राजनीतिक दलों का यही काम है और ये काम हम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मंईयां सम्मान योजना के बाद हम कई और योजनाएं लायेंगे। जो राज्य को आगे ले जायेगा। जैसे एक योजना है – जोहार परियोजना। इसका दूसरा चरण शुरु किया जायेगा। इसके अंतर्गत आनेवाले तीन साल में राज्य में सभी मंईयां और वंचित समाज के लोगों में आजीविका और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मंईयां बलवान योजना और मंईया उद्यमी योजना को अलग-अलग समय पर धरातल पर उतारा जायेगा।
उन्होंने कहा कि नीतियां जब सही दिशा में होती हैं तो परिणाम भी जमीन पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य में 100 सीएम ऑफ एक्सीलेंस स्कूल, पांच बालिका आवासीय विद्यालय, 23 इंजीनियरिंग कॉलेज और झारखण्ड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, 12 डिग्री कॉलेज और चतरा में भीम राव यूनिवर्सिटी की स्थापना की जायेगी। उन्होंने अपने भाषण में दावोस और यूके की यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि जल्द ही यहां के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए वहां भेजा जायेगा और नॉलेज कॉरिडोर विकसित किया जायेगा। उन्हें इसके लिए स्कॉलरशिप भी प्रदान किये जायेंगे। साथ ही दिशोम गुरु के नाम पर एक स्कॉलरशिप चलाने की भी उन्होंने बाते कहीं।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सदन में कहा कि सर्वाधिक सरस्वती पूजा हमारे यहां होती है। लेकिन सर्वाधिक ब्रिलियेन्ट बच्चे जापान में पैदा होते हैं। सर्वाधिक लक्ष्मी पूजा भारत में होती है और सर्वाधिक धन अमेरिका जैसे देशों में हैं। कहीं तो कुछ गड़बड़ हैं। विश्वकर्मा पूजा हर गली मुहल्ले में हमारे यहां होता है। लेकिन इस क्षेत्र में भी हम बहुत पीछे हैं। यहां चाइना कमाल दिखा रहा है। कहीं न कहीं तो झोल है। ये भाजपावाले पढ़ने को नहीं कहेंगे। लेकिन पूजा-पाठ करने को कहेंगे। लाठी-डंडा चलाने को कहेंगे। ये कौन से रास्ते पर विश्व गुरु बनेंगे। पता नहीं चल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही झारखण्ड का निर्माण करानेवाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम पर दिशोम गुरु गुरुजी मेमोरियल का निर्माण किया जायेगा। विश्वस्तर पर ले जाने के लिए विभिन्न जिलों में 35 मेगालिथ और साहेबगंज के फॉसिल्स पार्क को विकसित किया जायेगा।
