सदन में हेमलाल मुर्मू ने कहा पाकुड़ में स्थिति गंभीर, 1000 फीट नीचे तक पानी नहीं, जो फिलहाल व्यवस्था देखने को मिल रहा, ऐसे में तो लोग प्यास से छटपटाकर मर जायेगा
झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र का आज 16वां दिन परम्परागत ढंग से छह मिनट विलम्ब से शुरु हुआ। प्रश्न काल के दौरान प्रश्नकर्ताओं की अनुपस्थिति भी आज खूब देखने को मिली। जिसका परिणाम यह हुआ कि आज पहली बार अल्पसूचित प्रश्न के सारे प्रश्नों के उत्तर दे दिये गये। चूंकि आज अल्पसूचित प्रश्नकाल के दौरान मात्र सात ही प्रश्न सदन में आने थे। उसमें भी भाजपा के दो विधायक अमित कुमार यादव और प्रदीप प्रसाद अनुपस्थित रहने के कारण प्रश्न ही नहीं पूछ सकें। ऐसे में बचे मात्र पांच प्रश्न, इसलिए इनके उत्तर भी मंत्रियों द्वारा जल्द दे दिये गये, जिसके कारण ये जल्द निबट गये।
अल्पसूचित प्रश्नकाल के दौरान इन दिनों माननीयों की अनुपस्थिति बता रही है कि ये सदन के प्रति कितने गंभीर हैं। खुद प्रश्न डाल रहे हैं और खुद सदन से अनुपस्थित भी हो जा रहे हैं। ऐसे में प्रश्नकाल में प्रश्नों के डालने का क्या मतलब समझा जाय? ये तो संबंधित दलों के विधायक दल के नेता ही बतायेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। आश्चर्य की बात यह है कि सर्वाधिक अनुपस्थिति भाजपा की ओर से ही रही। जो बताता है कि यहां का विपक्ष सदन के प्रति क्या रूख अपना रहा है?
सदन में आज उस वक्त भी गहमागहमी देखने को मिली, जब आसन ने हेमलाल मुर्मू का नाम पुकारा और हेमलाल मुर्मू ने आसन से कहा कि उन्होंने जो प्रश्न पूछे हैं, उनका उत्तर ही नहीं मिला है। हेमलाल मुर्मू को जल्द ही उत्तर उपलब्ध कराया गया। हेमलाल मुर्मू का प्रश्न था क्या सरकार ने राज्य के सभी जिलों विशेषकर संथाल परगना के सूखा प्रक्षेत्र में चालू/लंबित पेयजल परियोजनाओं व ऐसी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की समीक्षा की है? उनका यह भी प्रश्न था कि सरकार द्वारा राज्य में 69916 खराब चापाकलों की मरम्मत करने का फैसला किया गया है, जिसमें पाकुड़ जिला में इसकी संख्या 3436 हैं, तो क्या सरकार इनके निर्माण और व्याप्त भ्रष्टाचार पर कुछ कर रही हैं।
मंत्री का उत्तर था कि पूरे राज्य में 1,44,906 चापाकल खराब है। उसे बनाने का काम किया जा रहा है। जिसमें पाकुड़ भी शामिल है। हेमलाल मुर्मू का कहना था कि मंत्री जी 400-500 फीट भूतल के चापाकल की मरम्मति की बात कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि उनके इलाके में 800-900 फीट तक भी पानी उपलब्ध नहीं हैं। कहीं-कहीं 1000 फीट नीचे तक पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में स्थिति गंभीर है। पूरा ड्राई जोन है। ऐसे में तो लोग प्यास से छटपटाकर मरेगा।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि क्या राज्य सरकार इतना दिवालिया हो गई कि वो चापाकल तक की मरम्मति नहीं करा सकती। अब चापाकल की मरम्मति के लिए भी केन्द्र पर निर्भर हो गई। सरकार तो बड़ी-बड़ी बातें करती हैं। राज्य में डीजल-पेट्रोल की किल्लत पर केन्द्र सरकार को कोस रही है और अब पेयजल पर भी केन्द्र को कोसने का मतलब क्या है? हद हो गई चापाकल के मरम्मति की बात का उत्तर देने में भी केन्द्र की ओर देखना, उन्हें आश्चर्य लग रहा है।
