झामुमो ने ठोकी ताल, असम विधानसभा की 31 सीटों पर चुनाव लड़ने का लिया निर्णय
झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) ने आगामी असम विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह निर्णय पार्टी की केंद्रीय नेतृत्व एवं संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। झामुमो का यह निर्णय उसी वक्त तय हो गया था, जब पिछले झारखण्ड विधानसभा चुनाव में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने यहां भाजपा को जीत दिलाने के लिए एड़ी-चोटी एक कर दी थी, फिर भी हेमन्त को न तो हिला सकें और न ही हरा सकें। हेमन्त सोरेन ने उक्त चुनाव में झामुमो को ऐतिहासिक जीत दिला दी और पुनः सत्ता पर काबिज हुए।
झामुमो का मानना है कि असम में बड़ी संख्या में झारखंड एवं आदिवासी मूल के लोग निवास करते हैं, जिनकी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आकांक्षाओं को मजबूत प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा इन समुदायों की आवाज़ को मजबूती से उठाने और उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से चुनावी मैदान में उतर रही है।
पार्टी का कहना है कि जल्द ही उम्मीदवारों की सूची तथा विस्तृत चुनावी रणनीति की घोषणा करेगी। झारखंड मुक्ति मोर्चा को विश्वास है कि असम की जनता विकास, सम्मान और अधिकार की राजनीति को समर्थन देगी। राजनीतिक पंडितों की मानें तो झामुमो के इस निर्णय से कांग्रेस के हाथ-पांव फूलने तय है। ऐसे भी इन दिनों असम में बड़े पैमाने पर रह रहे झारखण्डियों की पहली पसंद हेमन्त सोरेन हैं। अगर असम में झामुमो ने बेहतर रणनीति के सहारे चुनाव लड़ ली तो इसमें कोई दो मत नहीं कि इस बार असम में झामुमो के खाते खुलने तय है, जो आगे चल कर भाजपा के लिए भी सिरदर्द साबित होंगे।
