राजनीति

विधायक अरूप चटर्जी ने ध्यानाकर्षण के समय उठाया धनबाद एयरपोर्ट का मुद्दा, जबकि राजेश कच्छप ने हटिया स्थित HEC की जमीन से जुड़े मामले को सदन में उठाया

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन बुधवार को निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा में धनबाद में एयरपोर्ट बनाने का मुद्दा उठाया। विधायक ने कहा कि धनबाद के लोग बार-बार धनबाद में एयरपोर्ट बनाने की मांग करते हैं। अरूप चटर्जी के सवाल पर विधायक मथुरा महतो ने भी साथ दिया और एयरपोर्ट की मांग रखी।

विधायक ने सदन में कहा कि धनबाद में एयरपोर्ट बनाने से सवाल का जवाब सरकार की ओर से आ चुका है, जिसमें कहा गया है कि जमीन की कमी और नजदीक में 50 किलोमीटर की दूरी पर बोकारो एयरपोर्ट का काम प्रगति पर है, इससे धनबाद में पर्याप्त जमीन के अभाव में एयरपोर्ट नहीं बनाया जा सकता है।

इसके जवाब में प्रभारी मंत्री दीपक बरुआ ने कहा कि धनबाद में बरवाअड्डा हवाई पट्टी है, जो 37 ए में है। कैटेगरी 1 के लिए 113 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। जहां एयरपोर्ट है, वहां सघन आबादी का इलाका है। इसलिए इसका विस्तार वहां संभव नहीं है। मंत्री ने बताया कि बोकारो में एयरपोर्ट निर्माण प्रक्रिया जारी है। सदन में अरूप चटर्जी ने कहा कि धनबाद में जमीन की कमी नहीं है और सरकार की अगर मंशा एयरपोर्ट बनाने की है तो जमीन उपलब्ध हो जाएगा। एफसीआई के पास 4000 एकड़ जमीन है, तोपचांची में 800 एकड़ जमीन है।

विधायक ने कहा कि एयरपोर्ट का यदि वहां निर्माण होगा तो इससे जैन और बौद्ध धर्म के लोगों का भी आना-जाना लगा रहेगा और इलाके में व्यापार की भी बढ़ोतरी होगी। झारखंड सरकार से केंद्र ने पूछा था कि धनबाद में क्या एयरपोर्ट होना चाहिए तो सरकार ने अपनी असमर्थता जाहिर की थी।

सरयू राय के सवाल पर मंत्री ने दिया जवाब, कहा- योजनाओं की स्वीकृति पूर्व में ही दे दी गई है

सदन में विधायक सरयू राय ने मानगो नगर निगम से जुड़ी छह योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति में कथित देरी को लेकर मामला उठाया। उन्होंने कहा कि नगर विकास विभाग के सचिव को इन योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। उन्होंने पूछा कि 17 फरवरी को जिला योजना चयन समिति की बैठक में चयनित इन योजनाओं को मुख्य अभियंता, तकनीकी कोषांग की ओर से तकनीकी स्वीकृति मिली है या नहीं।

यह भी सवाल उठाया कि जब इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए मानगो नगर निगम के पास नागरिक सुविधा मद में पर्याप्त राशि उपलब्ध है और राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ना है, तो फिर प्रशासनिक स्वीकृति में देरी क्यों हो रही है। इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने जवाब दिया कि योजनाओं की स्वीकृति पूर्व में दे दी गई है और विभाग की ओर से इस संबंध में औपचारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वीकृति की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।

अवैध खनन से मौत का मामला

झरिया विधानसभा क्षेत्र में अवैध खनन के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इस घटना को लेकर झरिया विधानसभा क्षेत्र की विधायक रागिनी सिंह ने सदन में आवाज उठाई गई। विधायक रागिनी सिंह ने अर्जेंट सूचना के माध्यम से सरकार का ध्यान इस मामले की ओर दिलाया। विधायक ने बताया कि 23 तारीख को झरिया क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियों के बीच एक मासूम बच्चा सो रहा था। इसी दौरान उसे रौंद दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और दिल दहलाने वाली है। रागिनी सिंह ने यह भी कहा कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले अक्टूबर में इसी तरह का हादसा हुआ था।

झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के प्रथम पाली में खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने हटिया स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (HEC) की जमीन से जुड़े मामले को सदन में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि HEC की जिस जमीनों पर पहले से निर्माण कार्य हो चुके हैं, वहां अब दोबारा अवैध तरीके से रजिस्ट्रेशन (निबंधन) का खेल चल रहा है। इस प्रक्रिया ने स्थानीय निवासियों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल है।

विधायक राजेश कच्छप ने तकनीकी खामियों और प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे जमीनों की रसीद NIC (नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर) के माध्यम से निर्गत की जा रही है, जिसका अंचल कार्यालय में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह जमीन न तो किसी जागीरदार की है और न ही जमींदार की, फिर बिना किसी रिपोर्ट के ऑनलाइन रसीद कैसे कट रही है?

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह समस्या एक विकराल रूप ले लेगी। विधायक ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निगरानी के लिए सदन एक विशेष समिति का गठन करे। विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार करते हुए विभागीय मंत्री ने सदन में स्पष्ट आश्वासन दिया कि यह विषय अत्यंत गंभीर है और सरकार इसे हल्के में नहीं ले रही है. इस मामले की गहन जांच के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की है.

हेमंत सरकार के मंत्री ने कहा कि इस घोटाले में जो भी अधिकारी या कर्मचारी शामिल पाए जाएंगे, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जब विधायक राजेश कच्छप ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच कमेटी में सदन के सदस्यों (विधायकों) को शामिल करने का प्रस्ताव रखा, तो सरकार ने इसे खारिज कर दिया। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल अलग से संसदीय समिति बनाने की आवश्यकता नहीं है। विभागीय जांच ही दोषियों को चिह्नित करने के लिए पर्याप्त है। जांच रिपोर्ट आने के बाद भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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