अपनी बात

परमहंस योगानन्द जी के सपनों को साकार करने तथा चरित्र व मूल्य आधारित शिक्षा दिलाने के उद्देश्य को लेकर जगन्नाथपुर में योगदा सत्संग सोसाइटी ने किया इंटर कॉलेज के नये भवन निर्माण के लिए भूमि पूजन

योगदा सत्संग विद्यालय को शानदार व सुसज्जित भवन देने के बाद योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया की रांची इकाई ने इंटर कॉलेज को भी शानदार व सुसज्जित भवन देने का प्रबंध कर लिया। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया से जुड़े संन्यासियों के समूह ने आज रांची के जगन्नाथपुर में प्रस्तावित योगदा सत्संग शैक्षणिक संस्थान (इंटर कॉलेज) भवन का वैदिक रीति से भूमि पूजन संपन्न किया।

भूमि पूजन को संपन्न करने के लिए भूमि पूजन स्थल पर योगदा के वरिष्ठ संन्यासी स्वामी गोकुलानन्द व ब्रह्मचारी भास्करानन्द मौजूद थे। जिन्होंने भूमि पूजन कार्यक्रम को संपन्न करने के क्रम में विद्यालय के आधार को मजबूती प्रदान करने के लिए वैदिक मंत्रों के बीच आधार शिला रखीं। इसके तुरन्त बाद ब्रह्मचारी भास्करानन्द ने वहां उपस्थित जन-समूह के बीच सभी के साथ दस मिनट का ध्यान और फिर भजन गाये। जिससे सारा वातावरण ही दिव्यमय हो उठा।

मंचासीन लेफ्टिनेंट जनरल ज्ञान भूषण ने इस अवसर पर कहा कि चाहे किसी व्यक्ति का चरित्र हो या किसी संस्थान की आधार शिला, दोनों के आधारस्तंभ इतने मजबूत होने चाहिए कि उसे कोई भी झंझावात प्रभावित न कर सकें। उन्होंने कहा कि हम इस महाविद्यालय की ऐसी भवन तैयार कर रहे हैं, जिससे यहां एक देशभक्त नागरिक का निर्माण हो सकें, साथ ही परमहंस योगानन्द जी के सपनों का मार्ग प्रशस्त हो सकें।

मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित स्वामी पवित्रानन्द ने कहा कि ये भूमि पूजन कोई सामान्य घटना नहीं हैं। यह एक नये चैप्टर की शुरुआत है। 14 करोड़ की लागत से बन रहे इस भवन के बाद, यहां से एक युवा जीवन, देश का भविष्य, शिक्षा की आत्मा, बुद्धिमत्ता आदि की एक नई इमारत खड़ी होगी। नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों के बिना तो हम एक बेहतर मनुष्य की कल्पना नहीं कर सकते। हम इस भवन में नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों को भी युवाओं में सींचित करेंगे।

पवित्रानन्द ने कहा कि परमहंस योगानन्द जी का जो सिद्धांत रहा है, उन सिद्धांतों को हम इस भवन में स्थापित करेंगे, ताकि इस भवन से निकला हुआ युवा स्वयं और देश दोनों का भला कर सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य जो आंतरिक प्रसन्नता और शांति को प्राप्त करना है, हम इन उद्देश्यों को पूरा करने में भी लगेंगे।

पवित्रानन्द ने कहा कि परमहंस योगानन्द जी बार-बार कहा करते थे कि शरीर, मन और आत्मा में संतुलन आवश्यक है। वे चाहेंगे कि भवन निर्माणोपरांत यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को सही शिक्षा मिल सकें, वे अपने चरित्र को और मजबूत तथा बेहतर कर सकें। ऐसे भी शिक्षा का मूल भाव एक बेहतर इन्सान ही होना है।

स्वामी भास्करानंद जी ने प्रस्तावित भवन की रूपरेखा विस्तार से बताई। यह प्रस्तावित इंटर कॉलेज झारखंड बोर्ड से संबद्ध होगा तथा आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, सेमिनार हॉल एवं प्रशासनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह संस्थान मूल्य-आधारित शिक्षा, चरित्र निर्माण एवं आत्म-विकास को केंद्र में रखकर संचालित किया जाएगा।

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