गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूरे झारखण्ड के विभिन्न अखबारों, चैनलों व पोर्टलों में विज्ञापनोत्सव की धूम, छपास की बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों व संस्थानों ने विज्ञापनों के माध्यम से पत्रकारों के साथ बनाये गहरे संबंध
वर्ष 2026 के पहले विज्ञापनोत्सव की आज पूरे झारखण्ड में धूम रही। ज्ञातव्य है कि पूरे देश में वर्ष में दो बार विज्ञापनोत्सव की धूम रहती है। एक स्वतंत्रता दिवस के दिन और दूसरा गणतंत्र दिवस के दिन। चूंकि वर्ष का यह पहला विज्ञापनोत्सव था। इसलिए आज पूरे झारखण्ड में सभी अखबारों, चैनलों व पोर्टलों में विज्ञापन का यह महापर्व धूमधाम से मनाया गया।
राज्य की राजधानी समेत विभिन्न शहरों से निकलनेवाले विभिन्न अखबारों ने विज्ञापनों के इस बाढ़ को देखते हुए विशेष पृष्ठों का प्रबंध किया था। जिनमें कई पृष्ठों पर विज्ञापनों की बाढ़ थी। सभी विज्ञापनों में गणतंत्र दिवस की बधाई की बात थी। केन्द्र सरकार, केन्द्र सरकार के विभिन्न केन्द्रीय विभागों/मंत्रालयों/उपक्रमों ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार, राज्य सरकार के विभिन्न राजकीय विभागों/मंत्रालयों/उपक्रमों ने भी राज्य में प्रकाशित होनेवाले विभिन्न छोटे-बड़े अखबारों पर कृपा लुटाई थी।
इनके द्वारा विज्ञापन के माध्यम से कृपा लुटाने का मकसद केवल एक था कि ये अखबार, चैनल व पोर्टल के लोग उनके विभागों/मंत्रालयों/उपक्रमों के खिलाफ कुछ भी नहीं लिखे। हमेशा उनके तरफ इनकी नजरे इनायत रहे। कुछ भी इनके यहां कार्यक्रम हो, ये लोग बुलाये और इन मीडिया हाउस में काम करनेवाले पत्रकारों का समूह विनयी भाव से उनके सम्मुख करबद्ध होकर खड़ा रहे और उन कार्यक्रमों का समाचार अपने यहां सकारात्मक रूप से प्रकाशित करते रहे।
इन मीडियाहाउस में काम करनेवाले पत्रकारों ने भी विज्ञापन की लाज रखने की कसम खाई और उनके प्रति हमेशा निष्ठावान रहने का वचन दिया। बताया जाता है कि राज्य से प्रकाशित होनेवाले कई अखबारों व संचालित होनेवाले चैनलों ने गणतंत्र दिवस को देखते हुए अपने यहां कार्यरत विभिन्न जिलों/अनुमंडलों/प्रखंडों में संवादसूत्र या न्यूज सप्लायर्स के रूप में काम करनेवाले लोगों को टारगेट दे रखा था कि उन्हें इस बार कितनी विज्ञापन लाकर देनी है।
इस टारगेट को पूरा करने के लिए तथा प्राप्त विज्ञापन पर अपना कमीशन लेने के लिए विभिन्न जिलों/अनुमंडलों/प्रखंडों के संवाददाता/संवादसूत्र व न्यूज सप्लायर्सों ने कड़ी मेहनत की। इस कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि कई अखबारों के कई पृष्ठों पर विज्ञापन ही विज्ञापन नजर आये। समाचारों का इन पृष्ठों पर टोटा रहा।
विज्ञापन देनेवालों में पहले स्तर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के मंत्री/सांसद/विधायक व छुटभैये नेता थे। जिन्होंने दिल खोलकर विभिन्न मीडिया हाउस के पत्रकारों को विज्ञापन दी। कई नेताओं ने तो कई पत्रकारों को बुलाकर मिठाई खाने के नाम पर पैसे थमाए और विज्ञापन की राशि अलग से थमाई। जिसे पाकर कई पत्रकार थई-थई हो गये और ऐसे नेताओं के आगे नतमस्तक होकर आजीवन उनकी छत्रछाया में रहने का संकल्प लिया।
इसके बाद बारी रही विभिन्न पुलिसकर्मियों की, कुछ थानेदारों व पुलिसकर्मियों ने भी पत्रकारों को विज्ञापन के नाम पर राशियां थमाई। चेहरे चमकाये। उसके बाद निजी व सरकारी कार्यालयों के बड़े अधिकारियों ने तो पूर्व की तरह सूची बना ली थी कि किसे विज्ञापन देना है और किसे इस बार विज्ञापन नहीं देना है। जिनको विज्ञापन नहीं मिलना था, जब उन मीडियाहाउस के लोगों को इस बात की जानकारी हुई, तो चल दिये उन अधिकारियों को निहोरा करने और इस निहोरा का प्रभाव यह पड़ा कि उन अधिकारियों का दिल पसीजा और दिल खोलकर विज्ञापन के लड्डू पत्रकारों के गोद में भर दिये।
बताया जा रहा है कि इस बार के विज्ञापनोत्सव से झारखण्ड के सभी छोटे-बड़े अखबार व अन्य मीडिया हाउस अघा गये हैं। सभी अपने न्यूज सप्लायर्सों के इस कला के मुरीद हो चुके हैं। सभी ने दिल खोलकर, विज्ञापन देनेवाले पत्रकारों को उनके कमीशन समय पर देने की बात कही है। वैसे पत्रकार जिन्होंने विज्ञापन देनेवाले से पहले ही रकम प्राप्त कर ली थी। उन पत्रकारों को टटका-टटका कमीशन दे दिया गया है और जिनकी रकम बाद में मिलनी है, उन्हें जल्द से जल्द विज्ञापन की राशि जमा करने की हिदायत दे दी गई है।
