राजनीति

डिप्टी मेयर संजीव ने नगर निगम द्वारा सेवा सदन को तोड़े जाने को लेकर उठाए सवाल, जिस समय नक्शा का कोई प्रचलन ही नहीं था, तो आज उनसे नक्शा क्यों मांगा जा रहा? बड़े पैमाने पर विरोध प्रारम्भ

विगत कई दिनों से रांची शहर में रांची नगर निगम के द्वारा पुराने भवनों को भी नोटिस दिया जा रहा है। जिससे पूरे शहर में भय का माहौल है। इस विषय को लेकर पिछले कई दिनों से उप-महापौर, संजीव विजयवर्गीय, मुख्य सचिव, झारखण्ड सरकार एवं प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग से मुलाकात कर एवं पत्राचार कर रांची शहर वासियों के समस्याओं के निदान के लिए भवनों को रेगुलाइज करने हेतु झारखण्ड सरकार के द्वारा कार्रवाई करने के लिए प्रयासरत हैं।

परन्तु आज अखबार के माध्यम से पता चला कि नागरमल मोदी सेवा सदन अस्पताल को रांची नगर निगम के द्वारा 15 दिनों में अस्पताल हटाने का नोटिस दिया गया। इस विषय पर संज्ञान लेते हुए श्री संजीव विजयवर्गीय, उप – महापौर, रांची द्वारा आज दिनांक चार अगस्त को रांची नगर निगम, उप-महापौर कार्यालय कक्ष में संवाददाता सम्मेलन आहुत की गयी।

संवाददाता सम्मेलन में माननीय उप-महापौर, रांची द्वारा कहा गया कि एक वैसी संस्था जो कि पिछले 50 सालों से भी, पूर्व से सेवा कार्य कर रही हैं। उनका अस्पताल भवन का निर्माण 1960 के आस-पास का है। पिछले कई वर्षों से यह अस्पताल बड़ी संख्या में हर दिन मरीजों का इलाज करता आ रहा है। रांची शहर में जब अस्पताल नहीं थे, नक्शे का प्रावधान नहीं था, तब से इस अस्पताल ने लाखों जिन्दगियाँ बचाई और आज इसे तोड़ने का फरमान जारी किया गया है।

ऐसे पुराने भवन को तोड़ने का नोटिस देना अव्यवहारिक है। सेवा सदन अस्पताल के साथ-साथ वैसे भवन जिनका रेगुलाइज नहीं हुआ हैं। वैसे भवनों को नियम संगत रेगुलाइज करने की प्रक्रिया जब तक पुरी न हो जाये, तब तक वैसे भवनों को हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई न किया जाए। एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री जी द्वारा गरीबों को एवं जिनका आवास नहीं उनको आवास देने का काम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कर रहें है।

वहीं रांची नगर निगम घरों को उजाड़ने का काम कर रहीं है। यह चिंतन का विषय हैं। वैसे गरीब लोग जिनके द्वारा जमीन का अतिक्रमण किया गया है। उनका सर्वे करा कर प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत उनको उजाड़ने से पहले उनको बसाने की योजना सरकार की बनानी चाहिए। भवन रेगुलाइज का शुल्क वर्तमान में 1000 रु / – प्रति वर्ग फीट है।

क्या Building Bylaws के इस नियम के तहत लोग इसे कर पाएंगे, आज मकान बनाने की कीमत 1000 एवं प्रति वर्ग फीट होगी। उतना ही सरकार फाइन लगाकर Deviation यानी भवन को रेगुलाइज करेगी? क्या ऐसे नियम से कोई आम व्यक्ति इसे कराने के लिए निगम में आएगा?  1960 में क्या कोई एजेन्सी थी, जो नक्शा बनाती थी, जितना मुझे जानकारी है कि Building Bylaws में भी 1974 के पूर्व के भवनो पर यह नियम लागू नहीं होता है तो फिर इस तरह की कार्रवाई क्यों?

आज शहर के एक लाख 80 हजार घर के मालिक भय में जी रहें है, तो क्या सरकार का यह कर्त्तव्य नहीं है कि जिस जनता ने सरकार बनाई है, उनके लिए राहत पहुंचाने का काम करें। मैं समझता हूँ कि शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता है। झारखण्ड सरकार इस विषय को संज्ञान में लेते हुए इस आदेश पर रोक लगाए एवं जल्द से जल्द पुराने भवनों को रेगुलाइज करने हेतु नियमावली बनाये। अन्यथा मजबुरन आम जनता को सड़क पर उतरने के लिए विवश होना पड़ेगा। जिसकी सारी जिम्मेवारी झारखण्ड सरकार की होगी।