पूरे झारखण्ड में विज्ञापनोत्सव हर्ष व उल्लास के बीच सम्पन्न, दिन भर विभिन्न अखबारों में छपे विज्ञापनों के बीच स्वयं को ढूंढते रहे ग्राहक व सरकार के लोग

जी हां, इस साल का पहला विज्ञापनोत्सव आज हर्ष व उल्लास के बीच संपन्न हो गया। हम आपको बता दें

Read more

झारखण्ड में शराब की होम डिलीवरी नहीं, हिन्दुस्तान में प्रकाशित समाचार का विभाग ने किया खण्डन

झारखण्ड सरकार का उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग 21 जनवरी 2022 को हिन्दुस्तान अखबार में प्रकाशित “शराब की होम डिलीवरी

Read more

सरकार के संरक्षण में लगातार आदिवासियों की जमीन लूटी जा रही – बाबू लाल मरांडी

आज दिनांक 17 अक्टूबर को बाजरा मौजा स्थित खाता संख्या 119 के 105 एकड़ गैर मजरुआ जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा

Read more

अभिनन्दन अभय मिश्रा को, जो सत्ता-सरकार-माफिया-पुलिस द्वारा रचे षडयंत्र व 40 मुकदमें झेलने के बावजूद विवेकानन्द विद्या मंदिर की रक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े हैं

मिलिये झारखण्ड हाई कोर्ट के अधिवक्ता अभय मिश्रा से, जिन पर 40 मुकदमें हैं, फिर भी किसी से नहीं घबराते

Read more

दीपक, बाबूलाल, धर्मपाल आदि भाजपाइयों को कुणाल षाड़ंगी, संजय सेठ, सूर्य प्रभात से कुछ सीखना चाहिए

राज्य सरकार और सिस्टम को दोष देनेवाले भाजपा के राज्यस्तरीय शीर्षस्थ नेताओं, आपको किसी दूसरे दल के नेताओं से कुछ सीखने की जरुरत नहीं हैं, आप ही के पार्टी के अंदर कई ऐसे-ऐसे नेता व छोटे कार्यकर्ता मौजूद है, जो इस कोरोना महामारी के वक्त मानवता की सेवा के लिए सबसे आगे निकल पड़े हैं, जिनकी प्रशंसा इन दिनों सर्वत्र हो रही हैं। आप लोग अभी भी राजनीति ही कर रहे हैं, उस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की तरह, जो कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ता कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नीचा दिखाया जाये,

Read more

सरकार किसी की हो दुगिया को मरना है, बेरोजगारों की औकात मात्र 14 रु. और मास्क के नाम पर दादागिरी सिर्फ जनता को झेलना है

सरकार किसी की भी हो दुगिया, भूख और बीमारी से तुम्हें ही मरना है। बेरोजगारों तुम्हारी औकात 14 रुपये प्रतिदिन से ज्यादा की नहीं हैं। रही बात तुम जनता, मास्क का जुर्माना सिर्फ तुम से ही वसूला जायेगा। हम तो पैदा ही लिये हैं राज करने के लिए, तुम्हारी जिंदगी तबाह करने के लिए, और ज्यादा दिमाग लगाए, हमको आंख दिखाए, तो समझ लो ये जो हर गली-मुहल्ले में पुलिस चौकी देखे हो न, पुलिस थाने देखे हो न, वो तुम्हारी सेवा के लिए हमने नहीं रखें, बल्कि तुम्हें हम इनके द्वारा अपने इशारे पर ऐसा केस में फंसवायेंगे कि सारी क्रांति जो हैं,

Read more

गाड़ी पर प्रेस, कोर्ट, पुलिस आदि लिखकर चलना पड़ेगा महंगा, होगी कार्रवाई

राज्य सरकार के परिवहन विभाग ने एक अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना में विधायिका प्राधिकार, न्यायपालिका प्राधिकार, कार्यपालिक प्राधिकार, वैधानिक आयोग एवं केन्द्रीय कार्यालय अथवा राज्यस्थित प्रतिष्ठानों से संबंधित वाहनों में कौन से नाम प्रयुक्त होंगे और उनके रंग क्या होंगे, इससे संबंधित जानकारी दी गई हैं। इसी में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि मोटरयान अधिनियम एवं नियमावली के प्रावधानों के आलोक में कोर्ट, आर्मी, पुलिस, प्रेस, सरकार, प्रशासन, मंत्रालय इत्यादि शब्दों का प्रयोग वर्जित है,

Read more

पता नहीं, धनबाद पहुंचते ही पुलिसकर्मियों का लोगों के प्रति रवैया क्यों बदल जाता है?

पता नहीं, धनबाद पहुंचते ही पुलिसकर्मियों का लोगों के प्रति रवैया क्यों बदल जाता है? किसी की भी सरकार हो, उनके सेहत पर क्यों नहीं असर पड़ता? थाना प्रभारी हो या पुलिस अधीक्षक किसी के भी कानों में पीड़ितों के दर्द क्यों नहीं सुनाई पड़ते, आखिर वहां दंबगई करनेवालों, अपराधियों तथा लूट-पाट करनेवालों को ही संरक्षण क्यों मिलता हैं? मैं जब धनबाद में ईटीवी में कार्यरत था तो उस दौरान पुलिस अधीक्षक सुमन गुप्ता का पदार्पण हुआ था,

Read more

क्या हम सही में अच्छे नागरिक हैं, हमें सरकार की गलतियों पर अंगूली उठाने का हक हैं?

जरा सोचियेगा, ये जरुरी भी है, हम हर बात में सरकार और नेताओं की गलतियां ढूंढ लेते हैं, उन्हें भला-बुरा कहने से नहीं चूकते, हर गलतियों के लिए उन्हें जवाबदेह ठहरा देते है, पर क्या हमने कभी सोचा कि क्या हमें सरकार की गलतियों पर अंगूली उठाने का हक है, वह भी तब जब हम खुद गलतियों को करने में कोई कसर नहीं छोड़ते? यह हम इसलिए कह रहे है कि अभी पूरा विश्व कोरोना के चपेट में हैं और उससे बचने के लिए तरह-तरह के नुस्खों पर अमल कर रहा है।

Read more

गलती करे रघुवर और झेले हेमन्त, BJP की गलती भुगते JMM, मात्र तीन साल का अनुबंध और अब सहायक पुलिसकर्मियों को चाहिए स्थायीत्व और सारी सुविधाएं

गलती करें रघुवर और झेले हेमन्त, भाजपा की गलती और भुगते झामुमो, मात्र तीन साल की अनुबंध पर सहायक पुलिसकर्मियों ने नौकरी पाई और अब इन्हें चाहिए स्थायीत्व और सारी सुविधाएं। है न कमाल की बात। जब आपको स्थायीत्व और सारी सुविधाएं चाहिए थी, तब आपने तीन साल का शपथ पत्र क्यों भरा? किसने आपको ऐसा करने पर मजबूर किया? उस वक्त किसकी सरकार थी, जिसने आपको ऐसा झांसा दिया? इसका जवाब सहायक पुलिसकर्मी आंदोलनकारी नहीं देते, बस उनका जवाब भी भाजपा नेताओं की तरह होता है।

Read more