झामुमो ने कांग्रेस और झारखण्ड में पूर्णतः मर चुकी राजद को दिया जवाब, राष्ट्रपति चुनाव में JMM करेगा द्रौपदी मुर्मू को वोट, कोई शक!

चार जुलाई को जिस प्रकार राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने एनडीए की राष्ट्रपति प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का अपने आवास

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CM हेमन्त के सोशल साइट देखनेवाले इतने शातिर है कि वे कबीर के दोहे का भी ऑपरेशन कर स्वहित में फायदा उठाने में शर्म महसूस नहीं करते

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के सोशल साइट को देखनेवाले इतने शातिर है कि वे कबीर के दोहे का भी ऑपरेशन कर

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किताबों की जगह हाथों में शराब देने को आमादा है झारखण्ड सरकार – आजसू

कोरोना के कारण पिछले दो सालों से स्कूल बंद हैं, बच्चों की पढ़ाई बाधित है। झारखण्ड सरकार को सरकारी स्कूलों

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JMM MLA मथुरा महतो ने की घोषणा एक मार्च को करेंगे झारखण्ड आंदोलनकारी विधानसभा का घेराव

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता एवं टुंडी विधायक सह झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संयोजक मथुरा महतो ने आज विद्रोही24 से बातचीत में कहा कि उनका संघर्ष मोर्चा आगामी एक मार्च को झारखण्ड विधानसभा का घेराव करेगा। उन्होंने कहा कि बीस वर्ष हो गये, झारखण्ड बने, पर दुर्भाग्य देखिये अभी तक हमलोगों ने अपने दिवंगत झारखण्ड आंदोलनकारियों व उनके परिवारों को वो सम्मान नहीं दिला सकें, जिसके वे हकदार है।

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मिलिये झामुमो के एक ऐसे विधायक मथुरा महतो से, जो सरल है, सहज है, सहृदय है

नाम मथुरा प्रसाद महतो। तीन बार विधायक। हमेशा टुंडी विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। मंत्री तक बने, पर घमंड आज तक छू नहीं सका। हमेशा सफेद कुर्ता-पायजामा में नजर आये। कोई बुलाएं, चाहे वो झुग्गी-झोपड़ी में रहनेवाला ही क्यों न हो, बड़े आदर के साथ उसके घर पहुंचे, जमीन पर ही बैठ गये और लीजिये अंतररंगता शुरु। बातचीत का ऐसा सिलसिला शुरु, ऐसी हंसी-ठिठोली शुरु, कि उस झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे परिवार की गम कब-कहां काफूर हो गई, कुछ पता ही नहीं चलता।

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आपके बेटे का राज है, थानेदार, बीडीओ, सीओ अगर आपकी बात नहीं सुने तो जुता-चप्पल चलाइये – वसन्त

मिलिये झामुमो के “रघुवर दास” यानी वसन्त सोरेन से… यह मैं इसलिए लिख रहा हूं कि गत् 25 जनवरी को दुमका के दुमका क्लब में आयोजित झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की प्रमंडलीय बैठक में झामुमो विधायक वसन्त सोरेन (राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के छोटे भाई) जिस प्रकार से अपने झामुमो कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। वो लग ही नहीं रह था कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के परिवार का एक सदस्य बोल रहा है।

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अवसरवादियों को अपनी किताबों की, पर मंच पर बैठे दिशोम गुरु को आज भी झारखण्ड की चिन्ता सता रही थी

क्योंकि गुरुजी तो गुरुजी है, उन्हें पहले चालाकी नहीं आयी तो आज वे क्या चालाकी करेंगे? जिन्हें नाटक करना था, उन्होंने खूब नाटक किया, खुब मुंह चमकाये, हाथ भांजे, चिल्लम-पो की। उस नाटक को देख प्रभावित हुए, कार्यक्रम का संचालन कर रहे पटना से आयातित एंकर ध्रुव कुमार ने तो प्रभात खबर के कार्यकारी संपादक एवं तीन किताबों के लेखक अनुज कुमार सिन्हा को भारत के किसी भी विश्वविद्यालयों से डी. लिट की मानद उपाधि देने की अपील तक कर दी।

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अपने विरोधियों के लिए चोट्टा व जनाजा निकालने की बात कहकर भाजपाइयों ने दोनों सीटें झामुमो गठबंधन को सौंप दी

अपने विरोधियों के लिए चोट्टा, आशिकी, जनाजा आदि भाषा का प्रयोग, क्या यह नहीं बताता कि भाजपा के बड़े नेताओं ने स्वीकार कर लिया कि उनके पास चुनाव लड़ने और जीतने को लेकर उनके पास भाषाओं का घोर अभाव है। पूर्व में भाजपा नेताओं की सभाओं में भीड़ इसलिए लगती थी कि उनके नेताओं में अपने विपक्षियों के लिए भी सम्मान हुआ करता था, कभी बिलो द बेल्ट वे वार नहीं किया करते थे, अगर उनके खिलाफ कोई विलो द बेल्ट वार भी करता तो वे मुस्कुराकर रह जाया करते थे, पर अब स्थितियां बिल्कुल बदल गई है।

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दुमका का चुनाव यानी हेमन्त की अग्निपरीक्षा, दुमका और बेरमो में महागठबंधन का पलड़ा भारी

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने आखिरकार दुमका सीट पर अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी। दुमका से शिबू सोरेन के पुत्र एवं युवा मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष वसन्त सोरेन पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार होंगे। वसन्त सोरेन के नाम की घोषणा हो जाने से किसी को आश्चर्य भी नहीं हो रहा, क्योंकि यह पहले ही तय था कि वहां जब भी चुनाव होंगे तो पार्टी का अगला चेहरा वहां वसन्त सोरेन ही होंगे। आज झामुमो के केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य द्वारा इसकी घोषणा कर दिये जाने से अब सारी बातों पर विराम लग गया।

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PM मोदी सर्वदलीय बैठक में सोशल डिस्टेसिंग का पालन कर रहे थे, उसी समय रांची में भाजपा के बडे़ नेता इसका धज्जियां उड़ा रहे थे

राज्यसभा का चुनाव कोई जीते, सवाल तो सिर्फ यह है कि इससे झारखण्ड को क्या मिल जायेगा? सवाल तो यह भी है कि इस बात की जानकारी तो सत्तापक्ष और विपक्ष में शामिल सभी विधायकों व उनसे जुड़े नेताओं को पता था कि जिस प्रकार की स्थितियां व परिस्थितियां हैं, झामुमो अपनी सीट आराम से निकाल लेगी और रही बात भाजपा की तो उसे बाकी मतों को अपनी ओर आकर्षित करने में ज्यादा दिमाग लगाना नहीं पड़ेगा, क्योंकि निर्दलीय सरयू राय जब देंगे तो भाजपा को ही अपना मत देंगे।

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