एक योगदा भक्त विवेक अत्रे की नजरों में योगदा सत्संग सोसाइटी व क्रियायोग विज्ञान प्रसार के 105 वर्ष तक का सफर

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) भारत की सर्वोच्च आध्यात्मिक संस्थाओं में से एक है, जिसकी स्थापना, विश्वविख्यात पुस्तक योगी

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104 वर्ष योगदा सत्संग सोसाइटी के, जहां लोग पूर्ण ध्यान के दर्शन और जीवन के ज्ञान से होते हैं लाभान्वित

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) का 104 वां स्थापना दिवस 22 मार्च को है। इसी दिन परमहंस योगानन्द (1893 — 1952)  ने 1917 में भारत में कई सहस्राब्दियों पूर्व अद्भुत हुए पवित्र आध्यात्मिक विज्ञान, क्रियायोग की सार्वभौमिक शिक्षा को उपलब्ध कराने के लिए योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना की थी। इन धर्म-निरपेक्ष शिक्षाओं में, सर्वांगीण सफलता और समृद्धि के साथ-साथ, जीवन के अंतिम लक्ष्य – आत्मा का परमात्मा से मिलन – के लिए ध्यान की विधियों का एक पूर्ण दर्शन और जीवन शैली का ज्ञान सम्मिलित है।

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आज ही के दिन (19 सितम्बर) यानी 100 साल पहले परमहंस योगानन्द ने अमेरिका की धरती पर पहला कदम रख, योग-विज्ञान की रखी थी नींव

 

आज से ठीक सौ साल पहले, 19 सितम्बर 1920 को एक युवा योगी अमेरिका की धरती, बोस्टन में अपने पांव रखे थे। उनका वहां जाना, भारत के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक उदारवादियों के प्रतिनिधि के रुप में हुआ था। उस युवा योगी ने धर्म-विज्ञान विषय पर अपने प्रभावशाली व्याख्यान से सभी के हृदय में यह वाक्यांश स्थापित कर दी, कि अपने अंतःस्थल में परमात्मा की उपस्थिति का भान कर, जीवन का परम उद्देश्य, आनन्द की प्राप्ति संभव है।

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