अवधेश कुमार पांडेय ने किया अवकाश ग्रहण, सभी ने उनकी सेवाओं को यादकर उन्हें सलाम ठोका

बात उन दिनों की है, जब मैं पटना से प्रकाशित हिन्दी दैनिक आर्यावर्त के लिए काम करता था। उस वक्त मैं आर्यावर्त में दानापुर से अनुमंडलीय संवाददाता था और इसी दरम्यान दानापुर अनुमंडल में वीरेन्द्र कुमार शुक्ल अनुमंडलीय जनसम्पर्क पदाधिकारी के रुप में नये-नये नियुक्त हुए थे। यह समय था – लालू प्रसाद यादव का। दानापुर का इलाका यादवों का गढ़ है और यहां लालू यादव की उस वक्त तूती बोलती थी। ऐसे भी उस वक्त लालू प्रसाद का आना-जाना यहां बराबर लगा रहता था।

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देते रहिये गाली मोदी को, पर अपना दीदा मत देखिये कि आपने अपने राज्य की क्या दुर्दशा कर दी?

देते रहिये गाली मोदी को, पर अपना दीदा मत देखिये कि आपने अपने स्वार्थ के लिए अपने ही राज्य को किस तरह तबाह कर दिया। मौका तो आपको भी आपके राज्यों की जनता ने दिया था, पर आपने किया क्या? आपने अपने क्षुद्र स्वार्थ के लिए अपने ही राज्य को अपने ही हाथों से तबाह और बर्बाद कर दिया। मैं देख रहा हूं कि देश में एक प्रकार की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ ऐसी आबोहवा का इजाद किया गया है कि जिसकी कोई औकात नहीं,

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झारखण्ड में राजद दो फाड़, राणा बने राजद लोकतांत्रिक के अध्यक्ष, राष्ट्रीय नेतृत्व पर हठधर्मिता का आरोप

झारखण्ड में राष्ट्रीय जनता दल लोकतांत्रिक का गठन हो गया, सर्वसम्मति से इसका अध्यक्ष गौतम सागर राणा को बना दिया गया, इसी बीच आज रांची में बड़ी संख्या में राजद के कार्यकर्ताओं ने राजद से सामूहिक इस्तीफा दिया तथा राष्ट्रीय नेतृत्व पर हठधर्मिता अपनाने का आरोप लगाया। राजद लोकतांत्रिक के नेताओं का कहना था कि राष्ट्रीय नेतृत्व के हठधर्मिता के कारण ही अन्नपूर्णा, गिरिनाथ, जनार्दन और मनोज भुईयां ने पार्टी से दूरियां बना ली।

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रांची में पीएम मोदी का रोड शो, सुरक्षाकर्मी और भाजपा कार्यकर्ता ज्यादा, जनता की भागीदारी कम

जिन्होंने 1990 और 1995 के लालू प्रसाद और उनके शासनकाल के बिहार को देखा हैं, वे 2014 और 2019 के नरेन्द्र मोदी और उनके भारतीय शासनकाल को भी देख लें। कोई अंतर नहीं, लोकप्रियता वही है। कार्यकर्ताओं में भी समानता यानी उस वक्त लालू प्रसाद के खिलाफ कोई भी बिहार में उनका कार्यकर्ता एक भी शब्द सुनने को तैयार नहीं होता, आज मोदी के भी कार्यकर्ता उनके खिलाफ एक भी शब्द सुनने को तैयार नहीं हैं। समर्थक भी उसी प्रकार के, कोई अंतर नहीं।

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यकीन मानिये, रांची भाजपा को और खूंटी कांग्रेस को, पूरे झारखण्ड में बर्बाद करके रख देगा

क्या भाजपा, क्या कांग्रेस, एक उम्मीदवार देने में इन दोनों दलों के पसीने छूट रहे हैं। आश्चर्य है इन राष्ट्रीय दलों के पास एक से एक समर्पित कार्यकर्ता है, पर इन समर्पित कार्यकर्ताओं पर इन पार्टियों के प्रदेश अध्यक्षों से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्षों तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं को भरोसा नहीं है, उन्हें लगता है कि दूसरे दलों में जो नेता हैं, वे ही भरोसे के काबिल है, इसीलिए ये पार्टियां, ऐसे नेताओं पर डोरे डालकर, उनकी गणेश परिक्रमा, मान-मनौव्वल कर….

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खुद को मजदूर बतानेवाले CM रघुवर अपने बेटे की शादी रायपुर में और रिसेप्शन तीन जगहों पर करेंगे

जब से एक खबर, मैंने एक दैनिक अखबार में पढ़ी है, मेरा दिमाग उड़ सा गया है। भला खुद को मजदूर का बेटा कहनेवाला, खुद को बार-बार गरीब मजदूर बतानेवाला व्यक्ति, भला अपने बेटे का रिसेप्शन वह भी तीन बड़े-बड़े शहरों में कैसे कर सकता है? इतनी बड़ी रकम उसके पास कैसे और कहां से आ गई? कि वह ट्रेन में बारात जाने के लिए एक स्पेशल बॉगी तक बुक करा ले रहा है।

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मंत्री सरयू राय ने भी दिये संकेत जेल जानेवालों में लालू प्रसाद, मधु कोड़ा के बाद रघुवर दास का नंबर

गत चार फरवरी को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने ताल ठोककर कहा था कि आनेवाले समय में मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके मंत्रिमंडल में शामिल कुछ मंत्री निःसंदेह जेल जायेंगे, उन्हें भगवान भी नहीं बचा सकता, कानून की तो बात ही छोड़ दीजिये। और लीजिये, आज छः फरवरी है, एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है…

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महेन्द्र सिंह जैसा जनता और सदन के प्रति समर्पित एवं कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तित्व मैंने आज तक नहीं देखा

लालू प्रसाद को कुछ सीटे कम मिल गई, झामुमो तो अलग झारखण्ड के लिए पहले से ही आन्दोलनरत थी, कांग्रेस और भाजपा ने थोड़ा जोर लगाया, लालू की बोलती बंद हो गई, जो लालू बिहार को बांटने के पक्ष में कभी नहीं थे, जिनका नारा ही था कि उनके लाश पर बिहार बंटेगा, पर बिहार बंटा, नया झारखण्ड राज्य का उदय हुआ।

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धन्य रांची का रिम्स कॉटेज धाम। जहां लालू करते विश्राम।।

भाई जय हो लालू भगवान की। माई समीकरण के जन्मदाता की। सामाजिक न्याय के मसीहा की। स्वपरिवार के लिए अपने पार्टी तक को दांव पर लगा देनेवाले की। चाहे जो हो जाये पर, बीजेपी और मोदी को उनके औकात दिखानेवाले की। चाहे पार्टी का जनाधार मिट्टी में ही क्यों न मिल जाये, फिर भी सर्वणों का मरते दम तक विरोध करनेवाले की। महागठबंधन बनाकर, मोदी के अश्वमेध घोड़े को रोकने के लिए सब कुछ दांव पर लगानेवाले की।

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मिट्टी में मिल जाउँगा…और गांधी जयंती के 150वीं वर्षगांठ पर जनता को फिर मूर्ख बनाउंगा, क्योंकि…

आज गांधी जयन्ती है, जीवन में शुचिता, सत्य, स्वच्छता, अहिंसा, सच्चरित्रता के प्रतीक महान आत्मा का जन्मदिन, और जरा देखिये इनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करनेवाले कौन लोग है? जिन्होंने अपने जीवन से शुचिता, सत्य, स्वच्छता, अहिंसा और सच्चरित्रता को कब का उतार फेंका, और सिर्फ स्वार्थ को अपने जीवन में उतार कर, स्वहित में जब चाहा राजनीतिक बयान दिया और खुद के ही बयान को अपने ही हरकतों से मिट्टी में मिला दिया।

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