कांग्रेस का अध्यक्ष मल्लिकार्जुन हो या थरुर या त्रिपाठी, क्या फर्क पड़ता हैं नाचना तो सोनिया व राहुल के इशारों पर ही हैं

कांग्रेस का अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हो या शशि थरुर या के एन त्रिपाठी, क्या फर्क पड़ता हैं, जब काम उन्हें

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राहुल जी, आपकी कांग्रेस ने यह पोस्ट डालकर, हनुमान की पूंछ में आग लगा दी, अब आपकी लंका को दहन करने से कोई रोक नहीं सकता

ये कांग्रेसी भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं। ये भारत को कितना जोड़ेंगे वो तो भारत के नागरिक ही जानते

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कभी टाटा-बिड़ला राजनीतिक दलों के निशाने पर होते थे, आज अडानी-अंबानी निशाने पर हैं, इसमें हैरानी की क्या बात है?

भाई मैंने तो इन राजनीतिक दलों को तब से देखा हैं, जब से होश संभाला है। दस वर्ष का था।

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हमेशा याद रखिये, जो कांग्रेसी हैं, वो आटा किलो में नहीं, बल्कि लीटर में खरीदते हैं, जैसे राहुल गांधी ने बताया आटा 40 रु/ली.

मुझे आज पता चला कि कांग्रेसी आटा लीटर में खरीदते हैं, जय हो राहुल गांधी की, भाजपा को शासन में

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“हुज़ूर ने ना दवा और न दुआओं के काबिल समझा, गुस्ताखी इतनी थी कि कफ़न ही मुनासिब समझा” – कुणाल

सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में पारित प्रस्तावों पर भारतीय जनता पार्टी ने विरोध जताया है। मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने सरकार की “निःशुल्क कफ़न” योजना पर गहरा ऐतराज जताते हुए इसे शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। भाजपा में इस निर्णय को अपरिपक्वता की पराकाष्ठा बताते हुए इसकी तुलना “अंधेर नगरी चौपट राजा” से कर दिया गया।

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सीपी ने राहुल को पप्पू बोला, बमके कांग्रेसी, सदन में किया हंगामा, क्या पप्पू शब्द सचमुच असंसदीय है?

क्या सचमुच पप्पू का मतलब गाली होता है? अगर पप्पू का मतलब गाली होता है तो कई भारतीय अपने बच्चों का नाम पप्पू क्यों रखते हैं? आखिर कई हिन्दी फिल्मों में बच्चों का नाम पप्पू क्यों है? अगर कोई व्यक्ति पप्पू बोलता है और आप चिढ़ जाते हैं तो इसमें गलती किसकी है? भाई कहा जाता है कि आप जितना चिढ़ेंगे, उतना लोग चिढ़ायेंगे, आप चिढ़ना बंद कर दीजिये, मामला ही शांत, पर आप को चिढ़ना-चिढ़ाना ही अच्छा लगता है

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डंडे मारनेवाली बयान देकर राहुल ने सिद्ध किया कि वे खुद चाहते है कि देश में मोदी सरकार बनी रहे

छोटे नेता या किसी खास विचारों के गुलाम लोग, अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग करते हैं, तो बात समझ में आती है कि चलो इनसे इससे अधिक की अपेक्षा नहीं की जा सकती, पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बड़े नेता एवं भविष्य के लिए प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रुप में जाने-जानेवाले राहुल गांधी जैसे लोग जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग करते हैं तो किसी को भी आश्चर्य हो सकता है।

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शरजिल ने अपने भाषण से शाहीन बाग की सच्चाई के साथ-साथ जेएनयू, राहूल और केजरीवाल के मुख से भी नकाब हटाया

जेएनयू के स्टूडेंट शरजिल इमाम के बयान ने पूरे देश में हलचल मचा दी है, लोग हैरान है कि कोई स्टूडेंट वह भी जेएनयू का खूलेआम इस प्रकार का वक्तव्य कैसे दे सकता है, और लोग उसके इस वक्तव्य का तालियां बजाकर कैसे स्वागत कर सकते हैं, पर यह हुआ है, वह भी शाहीनबाग में हुआ है, जिसका समर्थन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियां, यहां तक की वामपंथी तथा स्वयं को बुद्धिजीवी कहलानेवाले लोगों ने भी किया है।

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पीएम मोदी और उनके समूहों की सभा को करारा जवाब दे रही हेमन्त की अकेली चुनावी सभा

भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं को इस बात का आभास हो गया है कि झारखण्ड में भाजपा की पकड़ ढीली होती जा रही हैं, दो चरणों के चुनाव बता रहे है कि भाजपा साफ है, इसलिए भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी सभा व रैलियों की संख्या बढ़ा दी है। गृह मंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के चुनावी सभा में गायब हो रही भीड़ ने भाजपा के दिल की धड़कन को और तेज कर दिया है।

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तो क्या झारखण्ड के CM रघुवर दास के दिन लद गये, क्योंकि युवा तो हर बात में इन्हें लताड़ रहे हैं

राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रति लोगों को गुस्सा कम नहीं होने जा रहा, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा हैं, युवाओं का गुस्सा भी उसी अनुपात में बढता जा रहा हैं। जरा देखिये आज यानी 14 नवम्बर की बात हैं, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने फेसबुक पेज पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को जमकर लताड़ लगाई हैं, पर ये क्या? यहां तो लोग सीएम रघुवर दास पर ही पिल पड़े, कई लोगों ने तो यहां तक कह दिया “अपने बारे में क्या ख्याल है, सर आपका।”

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