भाजपा व हिन्दू संगठनों के आगे झूकी हेमन्त सरकार, घाटों पर अर्घ्य देने की मिली छूट, कोरोना का खतरा भी बढ़ा

लीजिये, भाजपा व हिन्दू संगठनों की जय-जय हो गई। अभी कुछ देर पहले जो झामुमो के केन्द्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य भाजपा व हिन्दू संगठनों के खिलाफ जमकर आग उगल रहे थे, राज्य सरकार ने भाजपा व हिन्दू संगठनों के आगे हथियार डाल दिये, शायद उसे लगा कि जनता इससे कही नाराज न हो जाये और इसका फायदा पांच वर्ष के बाद होनेवाले विधानसभा चुनाव में भाजपा न उठा ले जाये, हालांकि ऐसा न कभी हुआ हैं और न होगा?

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वाह री सोच, भाजपावाले किसी पत्रकार को झूठे मुकदमे में फंसाकर उसके सम्मान के साथ खेल जाये तो ठीक और दूसरे दलवाले करें तो गलत

उधर अर्नव की गिरफ्तारी हुई और इधर भाजपा को बेचैनी की बीमारी हो गई। भाजपा अर्नव की गिरफ्तारी को आपातकाल से जोड़ रही है, तथा इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश भी कर रही है, जबकि जिन्हें थोड़ी सी भी राजनीतिक समझ है, वे जानते है कि ये नेता व राजनीतिक दल किसी के नहीं होते, बस वे मौके का लाभ उठाना जानते हैं, चाहे वो कोई भी राजनीतिक दल ही क्यों न हो?

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रांची के चित्रकार दयाल साव ने चित्र के माध्यम से जन-जागरण चलाया, दिया संदेश – जल्द हारेगा कोरोना

इस कोरोना महामारी से लड़ने व जन-जागरण चलाने में केवल राजनीतिक दल या पत्रकार या सामाजिक संगठन ही नहीं सक्रिय हैं, बल्कि कुछ चित्रकार भी हैं, जो अपने कूचियों से लोगों को जगाने की सफल कोशिश कर रहे हैं, जिसका फायदा समाज को मिल रहा है। हमारा मानना है कि जिस देश में समाज का हर वर्ग महामारी से लड़ने के लिए निकल पड़ता हैं, वहां महामारी को हारना ही पड़ता हैं, निःसंदेह हम जल्दी ही कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करेंगे।

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मुख्यमंत्री के रुप में बहुत तेजी से लोकप्रियता की ओर अग्रसर हुए हेमन्त सोरेन

आम जनमानस में हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री के रुप में बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, अगर लोकप्रियता का ग्राफ इसी तेजी से रहा, तो जान लीजिये अगले विधानसभा चुनाव में भी हेमन्त की सत्ता बरकरार रहेगी। हेमन्त की लोकप्रियता केवल जनता के बीच ही नहीं, बल्कि उन राजनीतिक दलों में भी बहुत तेजी से हो रही हैं, जो भाजपा को पसन्द नहीं करते या भाजपा को बहुत ही पसन्द करते हैं।

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टीएन शेषण जिन्होंने लोकतंत्र का चीरहरण करनेवाले सारे राजनीतिज्ञों को औकात बताई, साथ ही बताया कि EC क्या होता है?

आज सबेरे नींद खुली, सोशल साइट के माध्यम से पता चला कि टीएन शेषण दुनिया में नहीं रहे, सचमुच मुझे बहुत धक्का लगा, धक्का इसलिए नहीं कि वे अब दुनिया में नहीं हैं, बल्कि धक्का इसलिए कि एक ऐसा शख्स आज दुनिया में नहीं हैं, जिसनें भारत में लोकतंत्र का चीरहरण करनेवाले सारे राजनीतिक दलों के नेताओं को उनकी औकात बताई, साथ ही यह भी बताया कि चुनाव आयोग क्या होता हैं?

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जनसभा दागी प्रत्याशियों को लेकर चलायेगी अभियान, राजनीतिक दलों से की अपील दागियों को न दें टिकट

जन जागरुकता तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करनेवाली संस्था जनसभा ने रांची प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से कहा कि आगामी विधानसभा में राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे वैसे प्रत्याशियों को अपना उम्मीदवार न बनाएं, जिन पर हत्या, यौन-शोषण, अपराध या भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, इनका कहना था कि ऐसे ही लोग जब सत्ता में आते हैं तो आम आदमी के लिए ये गंभीर समस्याएं खड़ा कर देते हैं, जिससे समाज व देश दोनों को खतरा होता है।

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दिनेश जी, आप मत भूलिये कि आप संवैधानिक पद पर हैं, राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाकर रखें

दिनेश उरांव जी, आप ये मत भूलिये कि आप संवैधानिक पद पर है, आप झारखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष हैं और सत्ता तथा विपक्ष दोनों के आप सिरमौर है, लेकिन जिस प्रकार से आप रघुवर भक्ति में लीन होकर, भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, वह एक स्पीकर को शोभा नहीं देता। आप इन सभी कार्यक्रमों में शामिल होकर, यह भी नहीं कह सकते कि आपको इसके बारे में जानकारी नहीं थी। 

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अगर आप बिना नंबर की गाड़ी चलाने या प्रदूषण बढ़ाने का शौक रखते हैं तो रांची में आपका स्वागत हैं

अगर आप बिना नंबर की गाड़ी चलाने का शौक रखते हैं, एकदम कंडम हो गये गाड़ी को सड़कों पर दौड़ाना चाहते हैं, चाहे उससे किसी की जान ही क्यों न चले जाये या उससे काले-काले जहरीले धुएं ही क्यों न निकलते हो, तो बस आपको कुछ करना नहीं हैं, सीधे झारखण्ड की राजधानी रांची पहुंच जाइये, आप यहां बिना नंबर की गाड़ी, कंडम गाड़ी, जहरीले धुएं फेकनेवाली गाड़ी को आराम से इधर से उधऱ दौड़ा सकते हैं, कोई आपको बोलनेवाला नहीं,

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कमाल हो गया, आडवाणी के लिए वे भी रो रहे हैं, जो कल तक उन्हें बिना गालियां दिये सोते तक नहीं थे

भाजपा या वर्तमान राजनीतिक दलों में किसकी हिम्मत है कि स्वयं को लालकृष्ण आडवाणी के सामने खड़ा होने का दुस्साहस

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जहां किसी विश्वविद्यालय का कुलपति, सेवा विस्तार के लिए नेताओं/सरकार की चिरौरी करें, वहां…

जिस देश व राज्य में विश्वविद्यालयों के कुलपति पद की बोली लगती हो, जहां कुलपति बनने के लिए प्राध्यापकों का दल किसी राजनीतिक दल के नेताओं की चिरौरी करता हो, जहां कुलपति बनने के लिए किसी संगठन से जुड़ा रहना आजकल प्राथमिकता हो गई हो, वहां इस बात की कल्पना करना, कि इन संस्थानों से स्वामी दयानन्द, स्वामी विवेकानन्द, रवीन्द्र नाथ ठाकुर जैसे महापुरुष, लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी कवयित्री तथा मुंशी प्रेमचंद जैसे साहित्यकार निकलेंगे,

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