विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष – परमहंस योगानन्द एक ऐसे संदेशवाहक जो विश्व के लिए क्रियायोग लेकर आए

वर्तमान युग में आधुनिक संसार योग विज्ञान के लाभों को अधिकाधिक स्वीकार कर रहा है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को

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10 मई को उनके जन्मदिवस पर विशेषः ग्रहणशील शिष्यों को ईश्वर-प्राप्त संत के रूप में रूपांतरित करने की शक्ति विद्यमान थी स्वामी युक्तेश्वर जी में

भारत की भूमि पर अवतरित महान् गुरुओं की चर्चा हो तो स्वयं ही मस्तक श्रद्धा से झुक जाता है। स्वामी

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परमहंस योगानन्द को क्रियायोग की प्राचीन वैज्ञानिक प्रविधि के प्रचार-प्रसार के लिए प्रशिक्षित करनेवाले एकमात्र गुरु युक्तेश्वर गिरि

“हिमालय के अमर संत महावतार बाबाजी के आदेश पर, स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि ने प्रसिद्ध आध्यात्मिक गौरव ग्रंथ, योगी कथामृत के

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महावतार बाबाजी स्मृति दिवस पर विशेषः जब बाबा जी ने अपने लाहिड़ी महाशय के लिए देखते ही देखते बना दिया सोने का अद्वितीय महल

परमहंस योगानन्द जी ने अपने गुरु स्वामी युक्तेश्वर गिरि व संस्कृत शिक्षक स्वामी केवलानन्द जी से एक बाकया सुना था,

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गुरु पूर्णिमा पर विशेषः महावतार बाबाजी, लाहिड़ी महाशय के महान गुरु, जो अनादि काल से आज भी जीवित है, जिन्होंने कितने ही महान आत्माओं को क्रिया योग की दीक्षा दी

आप माने या न माने, पर ये शाश्वत सत्य है कि जिन्होंने भी महान आध्यात्मिक संत परमहंस योगानन्द जी द्वारा

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परमहंस योगानन्द के जन्म तिथि पर विशेष… परमहंस योगानन्द, योगदा मठ और क्रिया योग

भारत तो सदियों से ऋषियों-महर्षियों का देश रहा हैं। यहां के ऋषियों ने पूरे विश्व को अपने दिव्य ज्ञान से अनुप्राणित किया। जिसके कारण संपूर्ण मानव जगत् स्वयं को उत्कृष्टता के सर्वोच्च शिखर पर खुद को ले जाने के लिए हमेशा से तत्पर रहा हैं। इन्हीं ऋषियों की परम्पराओं में एक परमहंस योगानन्द हुए, जिन्होंने पूरे विश्व में पूर्व और पश्चिम के बीच जो दूरियां थी, उसे अपने आध्यात्मिक प्रकाश से सदा के लिए मिटा दिया।

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आधुनिक भारत के महान अवतार महावतार बाबाजी जो ईश्वरीय कार्य के लिए सहस्राब्दियों से आज भी जीवित हैं

आपको आश्चर्य होगा कि इस पृथ्वी पर और खासकर भारत के उत्तर में हिमालय में स्थित बद्रीनाथ की गुफाओं में पिछले सहस्राब्दियों से एक महामानव आज भी स्थूल शरीर के रुप में हमारे बीच विद्यमान है, जो महावतार बाबाजी के नाम से जाने जाते हैं। महावतार बाबाजी का सबसे पहला परिचय महान आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानन्द जी ने 1946 ई. कराया था, जब उन्होंने इसकी सबसे पहली चर्चा “ ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी” में की।

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योगदा आश्रम आकर मैं धन्य हो गया, मैं परम सौभाग्यशाली मुझे आने का अवसर मिला – शिवराज

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिव राज सिंह चौहान, के शब्दों में, “योगी कथामृत पढ़ ही रहा था कि रांची आने का कार्यक्रम बन गया। यहां स्वाभाविक रुप से इच्छा हुई कि “योगदा” जाना ही चाहिए। धन्य हो गया और रुकने की इच्छा थी, अद्भुत दिव्य ऊर्जा क्षेत्र जहां बैठकर ध्यान की इच्छा होती है। परम सौभाग्यशाली हूं, आने का अवसर मिला।”

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जब गुरु ने अपने शिष्य को हिमालय की गुफा में बुलाया

आषाढ़ पूर्णिमा अर्थात् गुरु पूर्णिमा। इस दिन पूरे भारत में विभिन्न आश्रमों एवं देवालयों में जबर्दस्त भीड़ उमड़ती है, लोग अपने आराध्य गुरुदेव के चरणों में लिपटने को व्याकुल होते है। रांची स्थित योगदा सत्संग आश्रम में भी इस दिन भव्य आयोजन होता है,

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