विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष – परमहंस योगानन्द एक ऐसे संदेशवाहक जो विश्व के लिए क्रियायोग लेकर आए

वर्तमान युग में आधुनिक संसार योग विज्ञान के लाभों को अधिकाधिक स्वीकार कर रहा है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को

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सिद्धार्थ त्रिपाठी का प्रयास रंग लाया, मेरी रांची मेरी जिम्मेवारी अभियान में योगदा से जुड़े सत्यमजी ने आज 41 पौधे हरमू मुक्तिधाम परिसर में लगवाएं

 “मेरी रांची मेरी जिम्मेवारी” अभियान के तहत मंगलवार को हरमू मुक्तिधाम परिसर को हरा-भरा करने की शुरूआत की गई। अपने

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परमहंस योगानन्द का योग, अंतिम नहीं है बल्कि यह प्रवेश द्वार है, उस परमपिता परमेश्वर तक पहुचंने का…

जय गुरु। पहली बार रांची मेरा पदार्पण 4 जून 1985 को हुआ था, क्योंकि 5 जून को मेरी शादी रांची में थी। मेरी पत्नी उस वक्त योगदा सत्संग विद्यालय की नौंवी कक्षा की छात्रा थी, उनके हाथों में कई बार योगी कथामृत मैंने देखा था, पर कभी पढ़ नहीं सका। उसी समय से कभी कभार योगदा सत्संग आश्रम में आना – जाना लगा रहा, कभी योगदा सत्संग द्वारा चलाये जा रहे औषधालय गया तो कभी योगदा सत्संग द्वारा चलाये जा रहे मोतियाबिंद के आपरेशन में शामिल हुआ।

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