एक योगदा भक्त विवेक अत्रे की नजरों में योगदा सत्संग सोसाइटी व क्रियायोग विज्ञान प्रसार के 105 वर्ष तक का सफर

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) भारत की सर्वोच्च आध्यात्मिक संस्थाओं में से एक है, जिसकी स्थापना, विश्वविख्यात पुस्तक योगी

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YSS द्वारा परमहंस योगानन्द के महासमाधि दिवस के उपलक्ष्य में ऑनलाइन सत्संग एवं ध्यान कार्यक्रमों में चार हजार से भी अधिक भक्तों ने लिया भाग

सत्तर साल पहले, सन् 1952 में इसी दिन, परमहंस योगानन्दजी ने महासमाधि (एक महान योगी का ईश्वर के साथ एकात्मता

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रांची सहित देश के 25 शहरों में कोरोना रोगियों की सेवा के लिए निकल पड़े योगदा सत्संग से जुड़े संन्यासी, YSS ने किया विशेष फोन नंबर जारी

कोविड महामारी से लोगों को निजात दिलाने के लिए योगदा सत्संग सोसाइटी देश के 20 राज्यों के 25 से अधिक शहरों में सेवा कार्य चला रही है। रांची में सहायता के लिए योगदा आश्रम ने 0651-6655500 टेलीफोन नंबर भी जारी किया है। इसके अलावा आश्रम के सदस्यों के माध्यम से भी सहायता प्रदान की जा रही है। योगदा सत्संग आश्रम ने शुक्रवार को इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।

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नौ भारतीय भाषाओं में योगदा सत्संग ऑनलाइन ध्यान की होगी शुरुआत, YSS अध्यक्ष स्वामी चिदानंद करेंगे शुभारंभ 

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाइएसएस) द्वारा ऑनलाइन सामूहिक ध्यान का आयोजन रविवार से किया जाएगा। यह ध्यान अंग्रेज़ी के अलावा हिंदी, बंगला, ओड़िया, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, तेलुगू, तमिल और मराठी में भी संचालित किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण योगदा आश्रम और ध्यान केंद्रों के बंद रहने के कारण साधकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन सामूहिक ध्यान और प्रार्थना की व्यवस्था की गई है।

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स्वयं को दिव्य प्रकाश से आलोकित करने का पर्व हैं दीपावली, इसे ऐसे जाने मत दीजिये – चिदानन्द

भारत दौरे के दौरान रांची प्रवास पर आये सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप एवं योगदा सत्संग सोसाइटी के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द ने योगदा संत्संग मठ में एक बड़ी आध्यात्मिक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का अर्थ ही हैं, प्रकाश की ओर गमन करनेवाले लोगों का देश। प्राचीन काल से ही भारत के ऋषियों ने मन के अंधकार पर विजय प्राप्त करने के लिए दिव्य आध्यात्मिक प्रकाश को पाने को सदैव उत्सुक रहें, और उसे पाने में कामयाब भी रहे।

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परमहंस योगानन्द लिखित पुस्तक ‘एक योगी की आत्मकथा’ ने मेरी जिंदगी ही बदल डाली – रजनीकांत

दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध सुपर स्टार और हिन्दी फिल्मों में भी अपनी गहरी पकड़ रखनेवाले सुप्रसिद्ध अभिनेता रजनीकांत का कहना है कि उनके जीवन में एक पुस्तक ने ऐसी उधम मचाई कि उनके जीवन को ही पूरी तरह से पलट कर रख दिया, वो पुस्तक थी “परमहंस योगानन्द द्वारा लिखित पुस्तक – एक योगी की आत्मकथा”। उनका कहना है कि 1978 में इन्होंने पहली बार इस पुस्तक को खरीदा और करीब 25 वर्षों तक वे इस पुस्तक के सम्पर्क में रहे,

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