CM हेमन्त के कार्यक्रम का सच दिखाना महिला पत्रकार को पड़ा भारी, कांग्रेसी नेता ने उक्त महिला पत्रकार के साथ की बदतमीजी, CM हेमन्त, राज्यपाल रमेश बैस व पत्रकार संगठन लें संज्ञान

रांची के मोराबादी मैदान में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा दिये जा रहे भाषण के दौरान जनता के लिए रखी गई

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भाजपा के “साम दाम दंड भेद” की नीतियों का जवाब देने के लिए मधुपुर के समर में उतरे हेमन्त, जीत को लेकर महागठबंधन के हौसले बुलंद

भारतीय जनता पार्टी के “साम दाम दंड भेद” की नीतियों का जवाब देने के लिए आखिरकार राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मधुपुर के चुनावी समर में कूद ही गये। यह झामुमो के कार्यकर्ताओं के हौसलों को बुलंद करने के लिए जरुरी भी था। हालांकि झामुमो की जीत सुनिश्चित है, फिर भी चुनावी समर में कार्यकर्ताओं व समर्थकों में जोश का तड़का न हो तो, जीती हुई बाजी भी पलट जाती है।

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गांठ बांध लीजिये, बिहार की जनता के मन-मस्तिष्क में चल रहे उथल-पुथल को टटोल पाना आसां नहीं, नामुमकिन हैं

बिहार की जनता ने जनादेश दे दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को अगले पांच साल के लिए फिर से सत्ता मिली है, जबकि महागठबंधन को फिर से विपक्ष में रहकर सरकार के काम-काज पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी डाल दी गई है, हालांकि महागठबंधन अभी भी इस हार को पचाने को तैयार नहीं है, उसे लगता है कि इवीएम तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने महागठबंधन की जीत में खलनायक की भूमिका अदाकर दी है, इधर भाजपा के लोग कुछ ज्यादा ही प्रसन्न है, क्योंकि बिहार में पहली बार भाजपा ने इतनी अधिक सीटें जीती है।

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बाबू लाल मरांडी मतलब उधार का नेता, उधार का नेता मतलब झारखण्ड में हेमन्त सोरेन और मजबूत

हेमन्त सोरेन ने विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत क्या दिखाई। भारतीय जनता पार्टी की सारी हवाई किला ही ध्वस्त हो गई। कल तक जो एक बार फिर रघुवर सरकार, घर-घर रघुवर का जो नारा दिलवाते थे। वे भी साफ हो गये। हेमन्त की आंधी ने तो भाजपा को इस कदर बर्बाद किया, कि भाजपा के पास कोई ऐसा नेता नहीं है, जो हेमन्त के सामने खड़ा भी हो सके और ये स्थिति खुद भाजपा ने ही बनाई है,

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अखबारों-चैनलों पर बिना एक पैसे खर्च किये हेमन्त ने महागठबंधन को झारखण्ड में दिलाई अपार सफलता

झारखण्ड में विधानसभा के पांचों चरणों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और इस पांचों चरणों के चुनाव संपन्न हो जाने के बाद जो परिणाम आ रहे हैं, वे बता रहे है कि इस बार हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड में महागठबंधन की सरकार बनना तय हैं और रघुवर दास के कुशासन का अंत होना सुनिश्चित है। कमाल है, जिस प्रकार से राज्य की भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले तक…

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चौथे चरण में भी महागठबंधन का पलड़ा भारी, कम मतदान से भाजपा को लग सकता है झटका

पहले, दूसरे, तीसरे और अब चौथे चरण के मतदान ने साबित कर दिया कि जनता परिवर्तन की राह पर चल पड़ी है। स्थिति ऐसी है कि लोग वर्तमान सरकार से इतने नाराज है कि मतदान केन्द्र तक जाना जरुरी नहीं समझ रहे और घरों में सिमटे रहे। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। जिस लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया था, इस बार दूरियां बना ली।

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तीसरे दौर में भी मतदाताओं की पहली पसन्द बनी महागठबंधन, भाजपा का 65 पार का सपना धूमिल होने के आसार

लक्षण ठीक नहीं दिख रहे भाजपा के। आज तीसरे दौर के मतदान की समाप्ति हो गई। 17 सीटों पर हुए मतदान के बाद जो रिपोर्टें आ रही हैं, वह भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं दे रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि यही हाल रहा तो समझ लीजिये कि भाजपा के दुर्दिन के दिन झारखण्ड में आ चुके। रांची विधानसभा सीट जो भाजपा का गढ़ माना जाता हैं, वह भी दरकने लगा हैं, जिन क्षेत्रों में भाजपा मतदाताओं की एक बड़ी तादाद हैं,

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दूसरे चरण का मतदान समाप्त, महागठबंधन और मजबूत, BJP और CM रघुवर की सेहत ठीक नहीं

लीजिये, धीरे-धीरे दूसरे चरण का मतदान भी समाप्त हो गया। राजनीतिक पंडितों का समूह जोड़-घटाव कर अपना विश्लेषण करने में लग गया। रिपोर्ट बता रही है कि आज जिन-जिन विधानसभा क्षेत्रों में वोट पड़े, उन सारे क्षेत्रों में जमकर वोटों का बिखराव हुआ और इसमें सर्वाधिक नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा हैं, जो भाजपा के जन्मजात वोटर थे, वे अपने घरों में रहकर समय बिताना ज्यादा जरुरी समझा।

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प्रथम चरण के मतदान ने दलबदलूओं को दिया झटका, महागठबंधन जनता की बनी पहली पसंद

प्रथम चरण के संपन्न मतदान ने सभी दलों के दलबदलूओं को एक बहुत बड़ी सीख दी है, कि वे चुनाव के दौरान जो थोक भाव में दलबदलू नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करते हैं, उन पर जितना जल्दी रोक लगा ले, उतना अच्छा है, क्योंकि जनता इन दलबदलूओं की तरह दलबदलू नहीं, इस बार जो चुनाव परिणाम आयेंगे, वे दलबदलूओं के सेहत के लिए ठीक नहीं हैं,

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महागठबंधन के आगे ‘65 पार’, ‘घर-घर रघुवर’,और अब ‘झारखण्ड पुकारा भाजपा दोबारा’ नारा भी फेल, अब केवल ‘मोदी’ नाम सहारा

आखिर ये भाजपा के साथ हो क्या रहा है? लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अतिउत्साहित भाजपा को झटके पर झटके लग रहे हैं, एक नारा ठीक से भाजपा कार्यकर्ताओं के जुबां पर आ भी नहीं पाता कि दुसरा लाइन में लग जा रहा हैं, राजनीतिक पंडितों की मानें तो इन सब का कारण भाजपा की लोकप्रियता में लगातार हो रही ह्रास है, युवाओं में दिन-प्रतिदिन भाजपा के प्रति बढ़ता गुस्सा है, तथा जनता में रघुवर दास के प्रति बढ़ता अविश्वास है

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