भाजपा कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी का नया नाम रखा “बाहरी जनता पार्टी”

जब से दिल्ली में नरेन्द्र मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्रिमंडल का नवविस्तार हुआ है। झारखण्ड के भाजपा कार्यकर्ता गुस्से में

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ऐसा कुकर्म भाजपाई ही कर सकते हैं, दूसरा कोई नहीं कर सकता, अपने ही भारतीय मजदूर संघ से संबंद्ध कार्यालय पर किया अवैध कब्जा

ऐसा कुकर्म भाजपा कार्यकर्ता ही कर सकते हैं, दूसरा कोई नहीं कर सकता। घटना धनबाद के कतरास स्थित सलानपुर कोलियरी तीन नंबर सीम की है। वही कतरास जहां भाजपा का दबंग विधायक ढुलू महतो का साम्राज्य चलता है। जिसके खिलाफ किसी की हिम्मत नहीं की खोख दें। उसी इलाके में ढुलू के लोगों ने भारतीय मजदूर संघ से संबंद्ध धनबाद कोलियरी कर्मचारी संघ एवं सर्व पंथ समादर मंच के कार्यालय पर जबरन कब्जा कर लिया।

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हेमन्त की सरकार क्या झारखण्ड में आई, अखबारों व भाजपा नेताओं/कार्यकर्ताओं के तेवर भी बदल गये

जरा सोचिए, अगर झारखण्ड में फिर से भाजपा की यानी रघुवर सरकार आ जाती तो क्या होता? फिर वहीं होता अमित शाह के आने के पहले से लेकर जाने तक अखबार अमित शाह से संबंधित समाचारों से पटे होते, पूरा अखबार अमित शाह व भाजपा नेताओं की जय-जयकार कर रहा होता, भाजपा भक्त पत्रकार अमित शाह के साथ सेल्फी लेने के लिए मारे-मारे फिर रहे होते,

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भाजपाइयों में हार को लेकर भारी गुस्सा, सभी ने रघुवर पर साधा निशाना, हार के लिए CM रघुवर को दोषी ठहराया

भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं, भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक भी इस करारी हार को पचा नहीं पा रहे हैं, वे इस पर अब खुलकर बोलने लगे हैं, पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार सफलता पर जिनके मुंह बंद थे, वे विधानसभा में भाजपा को मिली करारी हार को देखने के बाद, अब खुलकर अपने ही नेता को निशाना बनाने लगे हैं।

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तेजी से घटी लोकप्रियता CM रघुवर की, CM की सभा में बच्चे तो हेमन्त की सभा में दिख रही मतदाताओं की भीड़

झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास कितने लोकप्रिय है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा लीजिये कि इनकी चुनावी सभा में अब मतदाताओं की संख्या कम, और बच्चों की संख्या ज्यादा होती हैं, ये बच्चे उनकी चुनावी सभा में भीड़ बढ़ाने का काम आजकल कर रहे हैं, पूर्व में जब चुनाव की घोषणा नहीं हुई थी, उस वक्त इनकी चुनावी सभा में भीड़ जुटाने का काम जिलाधिकारियों का होता था।

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सुचित्रा हत्याकांड का आरोपी व BJP नेता शशिभूषण को माफ करने को संघ के स्वयंसेवक भी तैयार नहीं

सुचित्रा मेहता हत्याकांड का आरोपी शशिभूषण के भाजपा में शामिल होने का बवाल फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। इधर न्यूज चैनल व अखबारों में धनबल से इस मामले को दबाने का भरसक प्रयास किया जा रहा हैं, पर सोशल साइट में ये मामला धीरे-धीरे गरम होता जा रहा हैं। आश्चर्य हैं कि इस मामले में संघ के स्वयंसेवक भी गर्म हैं और इस मामले को वे सोशल साइट पर पूरजोर ढंग से उठा भी रहे हैं,

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टिकट कटने के भय से चल दिये सी पी सिंह ‘घर-घर रघुवर’ कहने, BJP कार्यकर्ताओं में भड़का आक्रोश

टिकट कटने का भय जो न करा दें, जरा देखिये न रांची विधानसभा के भाजपा विधायक और राज्य के नगर विकास एवं परिवहन मंत्री सी पी सिंह का हाल, जनाब फिलहाल “हर-हर रघुवर, जय-जय रघुवर, घर-घर रघुवर” गली-मोहल्ले में रटते चल रहे हैं और इनके साथ वे टी-वी चैनल्स भी हैं, जिनके मालिक भाजपा की कृपा से राज्यसभा का सुख उठा रहे हैं, और वे अखबार भी जो भाजपा को पुनः सत्ता में लाने के लिए दृढ़संकल्पित हैं।

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5 स्टार जिंदगी जीनेवाले पत्रकारों को CM ने थमाया पेंशन और BJP कार्यकर्ताओं को थमाया झूनझूना

सबसे पहले बात भाजपा कार्यकर्ताओं की ही कर लेते हैं, उसके बाद बात करेंगे सीएम रघुवर द्वारा तथाकथित पत्रकारों को दिये जानेवाले पेंशन की। आज जैसे ही अखबारों के माध्यम से पता चला कि पत्रकारों को अब राज्य सरकार ने पेंशन देने की बात की है, तो सर्वाधिक आक्रोश भाजपा कार्यकर्ताओं में देखने को मिला। कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने हमें फोन किया और बधाई दे दी कि भैया बधाई हो, आप पत्रकार है,

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महामानव जेपी नड्डा का दर्शन कर अभिभूत हुए BJP कार्यकर्ता, दिखाई भक्ति, की पुष्पवृष्टि, लिया संकल्प करेंगे नड्डा के सपनों को साकार

कल भाजपाइयों, भाजपा समर्थित अखबारों-चैनलों-पोर्टलों के संवाददाताओं व संपादकों, भाजपा समर्थक व्यापारियों ने रांची में इस प्रकार शमां बांधा, जैसे लगा कि कल रांची में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा नहीं, साक्षात् इस झारखण्ड की धरा को पवित्र करने के लिए महामानव का पदार्पण हुआ है, जमकर एयरपोर्ट पर ढोल-ताशे बजाये गये, नृत्य किये गये, भाजपा के झंडे लहराये गये,

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रांची में पीएम मोदी का रोड शो, सुरक्षाकर्मी और भाजपा कार्यकर्ता ज्यादा, जनता की भागीदारी कम

जिन्होंने 1990 और 1995 के लालू प्रसाद और उनके शासनकाल के बिहार को देखा हैं, वे 2014 और 2019 के नरेन्द्र मोदी और उनके भारतीय शासनकाल को भी देख लें। कोई अंतर नहीं, लोकप्रियता वही है। कार्यकर्ताओं में भी समानता यानी उस वक्त लालू प्रसाद के खिलाफ कोई भी बिहार में उनका कार्यकर्ता एक भी शब्द सुनने को तैयार नहीं होता, आज मोदी के भी कार्यकर्ता उनके खिलाफ एक भी शब्द सुनने को तैयार नहीं हैं। समर्थक भी उसी प्रकार के, कोई अंतर नहीं।

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