जो किसान आत्महत्या करें, वह किसान हो ही नहीं सकता…

किसान न हत्या करता है और न ही आत्महत्या। वह प्राणदाता है, वह अन्नदाता है, वह पूरे विश्व को अपने खून-पसीने से अन्न उपजा कर सभी का भरण-पोषण करता है, अगर वह आत्महत्या करने लगे, तो यह पूरे देश का दुर्भाग्य है, विश्व का दुर्भाग्य है और इस पाप से विश्व का कोई मानव बच नही सकता, क्योंकि जिसके अन्न खाकर वह जी रहा है, उसके सुख-दुख की जिम्मेवारी भी उसी की है, पर यह सोच आदर्श जीवन की पराकाष्ठा है…

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