करिया मुंडा को नजरंदाज करना नीलकंठ को भारी पड़ सकता हैं, भाजपा की हालत खूंटी में ठीक नहीं

खूंटी में जो लोग रघुवर के अतिप्रिय ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा को बेहतर स्थिति में मानकर चल रहे हैं, उनके लिए इस बार का विधानसभा चुनाव उन्हें सकते में डाल सकता है। फिलहाल खूंटी में विपक्ष मजबूत स्थिति में हैं, क्योंकि पिछले कई सालों से पत्थलगड़ी मामले को झेल रहा खूंटी, नक्सलियों व ईसाई संगठनों के इन स्थानों पर तेजी से मजबूत होने के कारण चुनाव की स्थिति बदलकर रख दी है।

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पत्थलगड़ी गांवों के आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण के बजाए रघुवर सरकार अपना रही दमनात्मक रवैया

6-7 अगस्त 2019 को सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं, पत्रकारों व वकीलों के एक दल ने खूंटी ज़िले के कई पत्थलगड़ी गावों (खूंटी प्रखंड के घाघरा, भंडरा प्रखंड के हाबुईडीह व अर्की प्रखंड के कोचांग व बिरबांकी) का दौरा किया। दल ने इन गावों व पड़ोसी गावों के आदिवासियों व ज़िले के उपायुक्त से मुलाकात की। इस तथ्यान्वेषण का उद्देश्य था आदिवासियों द्वारा पत्थलगड़ी करने के कारणों व पत्थलगड़ी के विरुद्ध प्रशासन की कार्रवाई को समझना।

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स्टेन स्वामी के आवास पर महाराष्ट्र पुलिस का छापा, सामग्रियां जब्त, आदिवासियों में नाराजगी

मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेनस्वामी के नामकुम बगइचा स्थित आवास पर अहले सुबह महाराष्ट्र पुलिस ने छापा मारकर, राज्य के सारे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की नींद उड़ा दी। फादर स्टेन स्वामी झारखण्ड का जाना मान नाम और हस्ती हैं, जिन्हें सभी मानवाधिकार कार्यकर्ता ही नहीं, आदिवासी समाज भी उनका नाम आदर से लेता है।

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खूंटी में समाचार संकलन करने के लिए निकले पत्रकारों ने “भूत” के साथ सेल्फी ली

खूंटी में पिछले कई दिनों से समाचार संकलन करने के लिए रांची से गये पत्रकारों को खूंटी का एक गांव “भूत” बहुत रास आया। इन पत्रकारों ने खूब गांव के बोर्ड “भूत” के पास जाकर सेल्फी ली और इसे अपने-अपने सोशल साइट्स पर दे डाला। जिस पर रिएक्शन भी खूब आ रहे हैं। ऐसे भी झारखण्ड का हर इलाका खुबसूरत हैं,

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ग्रामीणों ने दिया सहयोग चारों जवान मुक्त, पर सरकार के खिलाफ जनाक्रोश बरकरार

लो कर लो बात, तीन नहीं चार जवानों को पत्थलगड़ी समर्थकों ने अगवा किया था। आज जैसे ही अहले सुबह ये खबर मिली की, पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा अपहृत तीन जवानों को पत्थलगड़ी समर्थकों ने मुक्त कर दिया, उसी वक्त ये भी समाचार मिला कि एक और जवान रिहा हुआ हैं, जिसे अपहृत कर लिया गया था, आश्चर्य इस बात की भी है कि चौथे जवान,

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अपहृत जवानों का अब तक नहीं मिला सुराग, खूंटी में तनाव, लाठी चार्ज, एक की मौत

आज अहले सुबह पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा अपहृत तीन जवानों को मुक्त कराने के लिए पुलिस ने खूंटी के गांवों में विशेष अभियान प्रारंभ किया। जिसका ग्रामीणों ने अपने ढंग से जोरदार विरोध किया, अपने पारंपरिक हथियारों से लैस और ईट पत्थरों से ग्रामीणों ने तलाशी अभियान में निकले पुलिस बल पर हमला किया, जिसके कारण पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी,

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रांची को लहकने से बचाने के लिए सीसीटीवी खंगालिये, कानून का राज स्थापित करिये

आप माने या न मानें, झारखण्ड में शासन नाम की कोई चीज ही नहीं, क्योंकि कहीं नक्सलियों ने, तो कही पत्थलगड़ी समर्थकों ने, तो कही असामाजिक तत्वों ने राज्य के विभिन्न शहरों व गांवों को अपने गिरफ्त में ले लिया हैं और ये जो चाहे वो कर रहे हैं और जनाब सीएम रघुवर दास को विकास, भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी शासन संबंधित बयानबाजी और विपक्षी दलों को गाली देने से उन्हें फुर्सत नहीं।

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लक्षण ठीक नहीं दीख रहे खूंटी के, सांसद के गार्डों को किया अगवा, हथियार भी लूटे

खूंटी का मसला हल नहीं हो रहा। जिस इलाके में कुछ दिन पहले पांच महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ था, वहां एक बार फिर आज तनाव दिखा। बताया जाता है कि आज घाघरा, मंदरुडीह, हुदाडीह और मतगड़ा के इलाकों में पत्थलगड़ी का कार्यक्रम था, जिसे पुलिसकर्मियों ने रोकने की कोशिश की, जिसका पत्थलगड़ी समर्थकों ने विरोध भी किया तथा वहां से पुलिसकर्मियों को खदेड़ दिया,

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घंटी बजानेवाला ब्राह्मण बुड़बक और चाचा नेहरु चोरों का प्रधानमंत्री

खूंटी के आदिवासी बहुल इलाकों में नये-नये टीचर पैदा हुए हैं, ये टीचर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर बच्चों के मन में बचपन से ही वह सब चीज डाल दे रहे हैं ताकि जब ये बड़े हो तो खुद ही भारत की कब्र खोद दें, जरा देखिये ये पढ़ा क्या रहे हैं? और बच्चे पढ़ क्या रहे हैं? ये टीचर नन्हे-मुन्ने बच्चों को पढ़ा रहे है कि ‘घ’ से ‘घंटी’ और ‘घंटी’ का वाक्य है – घंटी बजानेवाला ब्राह्मण बुड़बक है।

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पत्थलगड़ी को लेकर CM रघुवर ने राष्ट्रविरोधियों को दी बहस करने की चुनौती

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राष्ट्रविरोधी शक्तियों को चुनौती दी हैं कि वे आएं और पत्थलगड़ी पर उनसे बहस करें। उन्होंने यह चुनौती 27 फरवरी को फेसबुक के माध्यम से दी। कमाल है, कभी वे पत्थलगड़ी में भाग लेनेवालों को राष्ट्रविरोधी करार देकर उन्हें कुचलने की बात करते हैं, तो कभी वे बहस करने को ललकारते हैं, यानी एक ही व्यक्ति जनता के सामने कुछ और फेसबुक के माध्यम से कुछ और बयान देता है।

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