कही रामकथा, कही सुंदर कांड तो कही दुर्गासप्तशती के मंत्रों से सर्वत्र गुंजायमान है रांची का छोटा सा ब्रह्मांड

कोरोना, सुंदर कांड, दुर्गासप्तशती, रामकथा, ब्रह्मांडकोरोना ने गजब ढाया है। भक्ति पर भी उसने अपनी ओर से अंकुश लगाने का

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जिनके शासन में महिलाओं को कोई सम्मान नहीं मिला, वे BJP नेता चले महाशक्ति की आराधना करने

नवरात्र का आगमन देख भाजपा नेताओं का समूह कोई चांदी की प्रतिमा, तो कोई पत्थर तो कोई तैल्य चित्र को ही सामने रख मां की आराधना में लग गया है। चूंकि शारदीय नवरात्र काफी मायने रखता है और कहा जाता है कि इसी नवरात्र में भगवान राम ने महाशक्ति की आराधना कर रावण पर विजय प्राप्त की थी, इसलिए इन दिनों जो भाजपा नेता झारखण्ड में होनेवाले विधानसभा चुनाव से जुड़े हैं, वे सभी शक्ति की आराधना में लगे हैं

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ऐसा आचरण करने से क्या फायदा, जब आपका संचित/अर्जित पुण्य ही नष्ट हो जाये

कबीर की एक पंक्ति है – माला फेरत जुग गया, मिटा न मन का फेर। कर का मन का छाड़ि के, मन का, मन का फेर।। ये पंक्ति बहुत कुछ कह देती है, अगर लोग इस पंक्ति को समझना चाहे। नवरात्र 18 अक्टूबर को ही समाप्त हो गया और आज विजयादशमी है। विजयादशमी को जयन्ती धारण किया जाता है। शमी का पूजन किया जाता है। अपराजिता पूजा होती है।

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अंधेरे में मन रहा दुर्गापूजा का त्यौहार, मां के भक्तों में रघुवर सरकार के प्रति गहरा आक्रोश

सुमित प्रसाद अपने परिवार के साथ निकले है, दुर्गा पंडालों का परिभ्रमण करने के लिए, पूरा परिवार प्रसन्न है, पर ये क्या?  घर से निकलते चार-पांच कदम चले ही थे कि बिजली गुल हो गई। अचानक अंधेरा छा गया, कुछ दिखाई ही नहीं पड़ रहा। वे और उनका परिवार सड़क के किनारे एक कोने का सहारा लिया। तभी सामने से आती मनचलों की भीड़ से उनका सामना हो गया।

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दुर्गा पंडाल में बिना नेता जी के चरण आये, भला महाशक्ति की पूजा कैसे प्रारंभ होगी?

आश्चर्य की बात है कि जिस महाशक्ति से सारा जगत व्याप्त है, जिनके नाम पर इतना तामझाम इनलोगों ने खड़ा किया। उसी महाशक्ति को स्वयं पूजा समितियां भी कुछ नहीं समझती। उसी महाशक्ति की महाप्रतिमाओं के सामने ये नेताओं को लाकर खड़ा कर देते हैं, और उनसे पंडाल का उद्घाटन करवाते हैं, नेताओं के इस कृत्य पर तालियां बजाते हैं, भला महाशक्ति के दरबार का उद्घाटन नेता करेंगे, ये सोचने की बात है।

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नवरात्र मनाएं, पर अखबार पढ़कर या चैनल देखकर नहीं…

नवरात्र आज से प्रारंभ हो गया। जो महाशक्ति को मानते हैं, जिनकी वो आराध्य हैं। उनसे प्रार्थना है कि वे कृपया अखबार पढ़कर या चैनल देखकर नवरात्र न मनाएं, क्योंकि आजकल के अखबारों और चैनलों में ज्यादातर लम्पटों की आर्टिकल अथवा प्रवचन कब्जा जमा चुकी है, जिससे आपकी नवरात्र में आध्यात्मिकता की पुट कम और बाह्याडंबर और पाखंड का जमावड़ा ज्यादा हो जा रहा हैं, जिससे आपकी भक्ति प्रभावित हो जा रही हैं।

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