डिप्टी मेयर संजीव ने नगर निगम द्वारा सेवा सदन को तोड़े जाने को लेकर उठाए सवाल, जिस समय नक्शा का कोई प्रचलन ही नहीं था, तो आज उनसे नक्शा क्यों मांगा जा रहा? बड़े पैमाने पर विरोध प्रारम्भ

विगत कई दिनों से रांची शहर में रांची नगर निगम के द्वारा पुराने भवनों को भी नोटिस दिया जा रहा

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न नगर निगम पर भरोसा और न कभी मांगी मदद, न इन्होंने पहुंचाई, खुद लगाया जोर, चमक गये छठ घाट

चुटिया पावर हाउस के पास है छठ तालाब। जहां बड़ी संख्या में कृष्णापुरी, रामनगर, रेलवे कॉलोनी, अयोध्यापुरी, अमरावती कालोनी, साई कालोनी, चुटिया आदि के हजारों संख्या में छठव्रती एवं उनके परिवार भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए पहुंचते हैं। रांची नगर निगम में पड़नेवाले इस छठ घाट पर किसी की नजर नहीं है। उनकी भी नजर नहीं जो यहां छठ घाट पर अर्घ्य देने के लिए आते हैं, या अपने लिए घाट पहले से ही छेक लेते हैं।

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साल भर के अंदर राजधानी की सूरत बदलनेवाले, रांची को तो नहीं बदल सकें, पर…

पहले विधायक थे, चलो मान लिया, एक विधायक की क्या औकात? बाद में झारखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष बने, चलो यह भी मान लिया एक विधानसभाध्यक्ष भी क्या कर सकता है? लेकिन अब तो आप नगर विकास मंत्रालय संभाल रहे हैं, अब आप ये कहेंगे कि हमें करने नहीं दिया गया, तो लोग कभी इस बात को नहीं स्वीकार करेंगे?

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उधर CM तीन साल की मस्ती में डूबे थे, इधर सांसद-मंत्री हो रही गड़बड़ियों से परेशान थे

क्या कोई भी व्यक्ति या संस्थान जिसने राज्य सरकार के साथ एमओयू किया हैं, क्या एमओयू करने के बाद उसे सरकारी लोगो तथा प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री या विभागीय मंत्री के फोटो को अपने विज्ञापन में प्रयोग में लाने का अधिकार मिल जाता हैं? भाजपा के ही सांसद महेश पोद्दार को, अपने ही सरकार के नगर विकास विभाग से पत्र लिखकर पुछने की यह आवश्यकता क्यों पड़ गई कि उन्हें आमंत्रण नहीं था, फिर भी उनका नाम विज्ञापन में कैसे आ गया?

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झारखण्ड में रघुवर की नई कंपनी की ब्रांडिंग से जनता कन्फ्यूज्ड

नई मंडली रांची आकर सीएम रघुवर दास की ब्रांडिंग में लग गई है। सीएम रघुवर दास भी नई मंडली की मूर्खतारुपी हरकतों से बहुत प्रसन्न है, इतने प्रसन्न है कि पूछिये मत। सूचना एवं जनसम्पर्क के वरीय अधिकारियों को कह दिया गया है कि आप अपना मुंह-कान सब बंद रखिये और ये जो नई मूर्ख मंडली आयी है, उसके आगे नतमस्तक हो जाये, वो जो करें, बस हां में हां मिलाइये, इससे ज्यादा कुछ करना नहीं है।

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