क्योंकि उस वक्त आप थोड़ा वक्त की भीख मांगेंगे, और वक्त के पास आपको देने के लिए वक्त नहीं होगा

जो आप चाहते हो, ईश्वर उसे खुलकर देता है, वो कोई कटौती नहीं करता, बस ये आपके उपर निर्भर करता है कि आपने ईश्वर से मांगा क्या? मैं 53 वर्ष में प्रवेश कर चुका हूं, इस दौरान जीवन-पथ पर अनेक लोग मिले, जिनसे मैंने सीखा और जो लोग मुझसे सीखना चाहे, उन्हें निस्वार्थ भाव से सिखाया, और मन में कोई लालसा भी नहीं रही कि जिन्हें मैंने सिखाया, उनसे कुछ प्राप्त हो, या वे मुझे सम्मान दें। 

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जब बारिश की बूंदे हमें स्पर्श करती है, तुलसी आप याद आते हैं…

जितने सरल शब्दों में गोस्वामी तुलसीदास ने वर्षा वर्णन कर युवाओं को सोचने पर मजबूर किया, उसे शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। संस्कार और चरित्र की सरल भाषा में सीख गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में खुब की है, हमारे विचार से प्रत्येक भारतीय परिवार को बिना किसी राग-लपेट के अपने बच्चों में संस्कार और चरित्र का बीजारोपण के लिए श्रीरामचरितमानस उनके हाथों में थमा देना चाहिए

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