CM हेमन्त, स्वास्थ्य विभाग के मंत्री/अधिकारी व अरुप चटर्जी याद रखें, गरीबो की आह आपको लग चुकी, अब आप कुछ भी कर लें, नहीं बचेंगें

याद करिये 22 मई 2021 का विद्रोही 24, जिसने डंके की चोट पर एक समाचार प्रकाशित किया था। समाचार का

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गुरु पूर्णिमा पर विशेषः महावतार बाबाजी, लाहिड़ी महाशय के महान गुरु, जो अनादि काल से आज भी जीवित है, जिन्होंने कितने ही महान आत्माओं को क्रिया योग की दीक्षा दी

आप माने या न माने, पर ये शाश्वत सत्य है कि जिन्होंने भी महान आध्यात्मिक संत परमहंस योगानन्द जी द्वारा

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प्रभात खबर आम को इमली बोले तो इमली बोलो, जाड़े को वसंत कहे तो वसंत कहो, ज्यादा दिमाग मत लगाओ

रांची से प्रकाशित अखबार प्रभात खबर ने 14 फरवरी यानी वैंलेंटाइन डे को वसंत ऋतु के रुप में आम जनता यानी अपने पाठकों के बीच में पेश कर दिया। जिसमें उसने अपनी लाइफ संडे पेज को मोहब्बत का मौसम के रुप में प्रस्तुत किया। एक से एक रांची के धुरंधर प्राध्यापकों, चिकित्सकों व कवियों के इस पर उद्गार भी आम पाठकों के बीच रख दिये गये, जैसे लगा कि 14 फरवरी यानी वैलेन्टाइन डे को जाड़ा अपना सारा दुकान समेट कर चल दिया और वसंत ऋतु ने अपनी सत्ता संभाल ली।

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वासांसि जीर्णानि यथा विहाय… मुझे विश्वास है कि सतीश नये रुप में अपने अधूरे कार्यों को पूरा करने फिर लौटेंगे

पता नहीं क्यों? श्रीमद्भगवद्गगीता पर हमारा अटूट विश्वास या सतीश वर्मा के प्रति मेरी श्रद्धा, मेरा दिल कहता है कि सतीश वर्मा फिर लौटेंगे, वे अपने अधूरे कार्यों को नये सिरे से पूरा करने को। श्रीमद्भगवद्गीता जो लोग पढ़े हैं, वे जानते है कि प्रत्येक जीवात्मा शरीर न होकर एक आत्मा है, जो निरन्तर अपने आपको उच्चतर श्रेणी में ले जाने के लिए नये-नये रुपों में अवतरित होते रहते हैं और ये सिलसिला तब तक चलता रहता है,

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भारत की दो बड़ी कम्यूनिटियों को जाहिल बनाने का काम किया हैं, खुद को सेक्युलर व साम्यवादी बतानेवालों ने

24 जून 2019 – तबरेज अंसारी पर चोरी का आरोप है और इसी आरोप में उन्मादी भीड़ द्वारा खंभे में बांधकर उसे पीटा जाता हैं और उसके बाद उसकी मौत हो जाती है। तबरेज अंसारी चूंकि मुस्लिम समुदाय से आता है, इसलिए इसे मुस्लिम नजरिये से देखा गया और पूरे देश में मुस्लिम संगठन इस घटना के खिलाफ सड़कों पर उतर गये, मामला संसद तक पहुंच गया।

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देश को ‘कबीर’ नहीं, ‘कबीर सिंह’ जैसा युवा चाहिए, जो लव और सेक्स के माध्यम से देश को नई ऊंचाई प्रदान करें

ये भारत नहीं, न्यू इंडिया है जनाब, क्योंकि अब देश को “कबीर” नहीं “कबीर सिंह” की जरुरत हैं। सचमुच आजकल कबीर सिंह की धूम है, ये कबीर सिंह कोई व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि एक फिल्म के किरदार है, जो आजकल पूरे देश में धूम मचाये हुए हैं, जिसे देखों इनकी चर्चा कर रहा है, कह रहा है वाह क्या फिल्म है और क्या कबीर सिंह है, गजब ढा दिया है इन्होंने, लोग खूब फिल्म देख रहे हैं, फिल्म बिजनेस भी अच्छा कर रही है,

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हे प्रभु, किसी भी राज्य को ऐसा CM न देना, जो शिक्षकों और गरीबों के बच्चों के साथ क्रूरता से पेश आएं

किसी ने ऐसे ही नहीं कह दिया कि लोकतंत्र अर्थात् मूर्खों का शासन। जब आप अयोग्य लोगों को चूनेंगे। धर्म और जाति के नाम पर वोट देंगे। मूर्खों की जय-जयकार करेंगे। गलत को गलत नहीं कहेंगे। बलात्कारी और दुष्चरित्रता में निपुण नेताओं को जातीयता में तौल कर, उसके पक्ष में मतदान करेंगे, तो पीसेगा कौन? वहीं न, जो इनके चक्कर में आयेगा?

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विकास को लेकर नक्सलियों को चुनौती देनेवालों, थोड़ा अपना गिरेबां भी देखो…

बहुत पहले, जब में बच्चा था, प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा करता था, हमारे बाबूजी बराबर हम भाई-बहनों को सीख देते, वे कबीर की पंक्ति बराबर गुणगुनाया करते, उन्हीं में से एक कबीर की पंक्ति ये भी थी – कबीरा आप ठगाइये, और न ठगिये कोय। आप ठगें सुख उपजे, और ठगें दुख होय।। कबीर कहते हैं कि आप भले ही ठगा जाइये, पर भूलवश भी किसी को ठगने की कोशिश न करें,

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प्यारे बच्चों, यह शरीर ईश्वर की अमानत है, इस अमानत को बेदाग रखते हुए, उन्हें वापस भी करना हैं

बहुत दिन हो गये, तुमलोगों से खुलकर बात नहीं हुई, आज मैंने सोचा कि तुमलोगों से बातचीत की जाय। तुम जहां भी हो, और जिस प्रकार ईमानदारी से अपने कार्य के प्रति समर्पित हो, यह देखकर हमें बड़ी प्रसन्नता होती हैं। प्रसन्नता इस बात को लेकर भी होती है, कि तुमलोग जहां भी रहते हो, एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ कि जिस दिन तुमलोग हमें याद नहीं किये हो, यह मेरे लिए ईश्वरीय कृपा है।

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CM साहेब, क्षमा मांगने से कोई छोटा नहीं हो जाता, थोड़ा बड़प्पन दिखाइये

CM साहेब, याद रखिये, दुनिया का कोई भी व्यक्ति, अगर किसी से, किसी बात को लेकर क्षमा मांगता हैं, तो वह इस कारण से, छोटा नहीं हो जाता, बल्कि वह और उसका व्यक्तित्व और निखरता हैं। शायद यहीं कारण रहा होगा कि सुसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा –क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।

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