2024 में मोदी को हराने की लालसा पाले, नीतीश को पता है कि विपक्षी दल का कोई नेता उन्हें PM पद के लायक नहीं समझता, तभी तो…

पहले सर्वाधिक स्वयं को होनहार माननेवाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह बताएं कि वे बिहार के मुख्यमंत्री पद के

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यह समय केजरीवाल, ममता बनने का नहीं, नवीन पटनायक बनने का है, PM में मीन-मेख निकालने से अच्छा है, आप स्वयं पर ध्यान दें

बार-बार कह रहा हूं, यह समय किसी पर दोषोरोपण करने या मीन-मेख निकालने का नहीं हैं और न ही अरविन्द केजरीवाल या ममता बनर्जी बनने का है, अगर ज्यादा लगता है कि कुछ बनना ही हैं तो मैं कहूंगा कि नवीन पटनायक बनिये, जो बिना किसी लाग-लपेट के अपनी जनता और देश के लोगों की निस्वार्थ भाव से अपनी सेवा दे रहे हैं। मैं कहता हूं कि अभी वक्त बहुत बुरा है, इसलिए वक्त को पहचानिये, क्योंकि वक्त किसी का नहीं होता, अगर वो किसी को अर्श पर पहुंचाता हैं,

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दीपक, बाबूलाल, धर्मपाल आदि भाजपाइयों को कुणाल षाड़ंगी, संजय सेठ, सूर्य प्रभात से कुछ सीखना चाहिए

राज्य सरकार और सिस्टम को दोष देनेवाले भाजपा के राज्यस्तरीय शीर्षस्थ नेताओं, आपको किसी दूसरे दल के नेताओं से कुछ सीखने की जरुरत नहीं हैं, आप ही के पार्टी के अंदर कई ऐसे-ऐसे नेता व छोटे कार्यकर्ता मौजूद है, जो इस कोरोना महामारी के वक्त मानवता की सेवा के लिए सबसे आगे निकल पड़े हैं, जिनकी प्रशंसा इन दिनों सर्वत्र हो रही हैं। आप लोग अभी भी राजनीति ही कर रहे हैं, उस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की तरह, जो कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ता कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नीचा दिखाया जाये,

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जनता को न मोदी, न केजरीवाल और न ही देश से मतलब है, उसे बस मुफ्तखोरी से मतलब है

जी हां, जनता न मोदी होती है और न ही केजरीवाल, जो उसे मुफ्तखोरी सीखा दें, उसे कर देती हैं मालामाल। मुफ्तखोरी एक ऐसी विधा है, जिसे हर कोई अपनाना चाहता हैं, चाहे वह नेता हो या जनता, बस उसे मौका मिलना चाहिए। एक उदाहरण देता हूं, जरा आप इसे समझने की कोशिश करिये, एक नेता चाहे वह आम आदमी पार्टी का केजरीवाल हो या भाजपा का नरेन्द्र मोदी।

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अरे नफरत फैलानेवालों ‘जी बिहार-झारखण्ड’ आखिर बिहार के बारे में केजरीवाल ने क्या गलत कहा?

सबसे पहला सवाल ‘जी बिहार-झारखण्ड’ वालों से क्या अरविन्द केजरीवाल देश के सभी राज्यों का अकेला मुख्यमंत्री है? क्या उसने सभी देश के सभी राज्यों के नागरिकों के स्वास्थ्य ठेका ले रखा है? क्या देश के सभी राज्यों के नागरिकों ने उसे मुख्यमंत्री बनाया है? और जब ऐसा नहीं हैं तो फिर अरविन्द केजरीवाल ने गलत क्या कहा?

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जब राजनीति में कुर्सी का स्वाद लगता है, तो निर्लज्जता के आभूषण पहनने को दिल मचल ही जाता है

याद करिये आज से ठीक छः-सात साल पहले दिल्ली में क्या होता था? एक कथित सत्य हरिश्चन्द्र के प्रतीक बाबा अचानक पैदा हुए, नाम था – अन्ना हजारे, उनके साथ बहुत सारे लोग जिनका नाम अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी, राजेन्द्र यादव आदि हुआ करते थे, जुड़ने शुरु हुए, बहुत बड़ा-बड़ा तिरंगा झंडा लहराया जाता था। लोगों को लगा कि बस अब भारत में क्रांति आनेवाला ही है, अरविन्द केजरीवाल को इस प्रकार पेश किया जाने लगा कि ये हरिश्चन्द्र ही बन बैठे,

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दिल्ली के CM अरविन्द केजरीवाल का आरोप, भाजपा UP और बिहार के लोगों को दिल्ली से भगाने में लगी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल गुस्से में हैं, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया है कि भाजपा अपनी हार की डर से दिल्ली के करीब 30 लाख वोटरों के नाम कटवा दिये, मगर ये वोटरों के कटे नाम, वे खुद जुड़वायेंगे। वे शुक्रवार को दिल्ली के मंगोलपुरी में विकास कार्यों को शुभारम्भ करने के वक्त बोल रहे थे। अरविन्द केजरीवाल ने इस दौरान यह भी कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी, उनके हर विकास के काम में अड़ंगा लगाते हैं।

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अफसोस! जिस देश में गांधी-पटेल जैसे नेताओं ने जन्म लिया, वहां केजरीवाल जैसे लोग भी…

इन दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सुर्खियों में हैं। इस बार की सुर्खियों उनके द्वारा देश के विभिन्न राजनीतिक दलो के प्रमुख नेताओं के खिलाफ आरोपों को लेकर नहीं, बल्कि इस बार वे उन प्रमुख नेताओं से विभिन्न न्यायालयों में लिखित आवेदन देकर माफी मांगने को लेकर सुर्खियों में हैं। हो सकता है कि माफी मांगने को लेकर, वे रिकार्ड भी बना लें।

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मैंने आप पर कृपा लूटाई, अब आप हम पर कृपा बनाये रखियेगा, और क्या कहूं?

दिल्ली व झारखण्ड में क्या अंतर हैं? दिल्ली और झारखण्ड में सिर्फ इतना ही अंतर है कि दिल्ली का सीएस अपने अपमान का बदला लेने के लिए अरविन्द केजरीवाल सरकार से टकरा रहा है, संघर्ष कर रहा है, जबकि झारखण्ड के सीएस के सम्मान की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास विपक्ष ही नहीं बल्कि अपने लोगों भी से टकरा जा रहा है, और उसे हर प्रकार से क्लीन चिट दिलवाकर सदा के लिए विभिन्न आरोपों से मुक्त कर देने का दुस्साहस भी करता है।

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1000 दिन के नाम पर रघुवर सरकार कर रही गलथेथरई, बेशर्मी का पीटा जा रहा ढिंढोरा

रघुवर सरकार की बेशर्मी और गलथेथरई देखिये, पूरे रांची को बैनर होर्डिंग्स से पाट दिया गया हैं। बैनर-होर्डिंग्स में केवल पीएम और सीएम हैं। बैनर-होर्डिंग्स ही नहीं, अखबारों और चैनलों को मुंहमांगी रकम मुंह में ठूंस दी गयी है। पत्रकारों, प्रधान संपादकों को मुख्यमंत्री के आगे ठुमरी गाने को कहा गया है। ये सभी पत्रकार, प्रधान संपादक और अखबार-चैनल के मालिक, एक पैर पर खड़े होकर रघुवर स्तुति गा रहे हैं। सभी स्तुति में यहीं कह रहे हैं कि रघुवर सरकार ने 1000 दिन पूरे कर लिये हैं।

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