HC के चर्चित अधिवक्ता अभय मिश्रा की रांची के अखबारों/चैनलों व राज्य सरकार को सलाह देनेवालों पर गंभीर टिप्पणी, दी पढ़ने की सलाह…

झारखण्ड उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता है – अभय कुमार मिश्रा। उन्होंने आज अपना दर्द विद्रोही24 से शेयर किया है।

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महापर्व छठ को लेकर बिहार/झारखण्ड के अखबारों/चैनलों के पास बतकुचन/बकैती के सिवा और क्या हैं?

सबसे पहले छठ को लेकर अखबारों या चैनलों में छपनेवाले या दिखाये जानेवाले बतकुचनों पर ध्यान दीजिये… रांची से प्रकाशित

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जब तक BJP में ओम प्रकाश, धर्मपाल व रघुवर की तिकड़ी मौजूद, हेमन्त को घबराने की कोई जरुरत नहीं

जब तक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा झारखण्ड प्रभारी ओम प्रकाश माथुर, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह एवं राज्य के अति होनहार पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की तिकड़ी झारखण्ड में विद्यमान रहेगी, हेमन्त सोरेन की सरकार बिना किसी विघ्न-बाधा के आराम से चलती रहेगी, साथ ही दुबारा फिर से सत्ता में भी आयेगी, इसमें अब किसी को किसी भी प्रकार से किन्तु-परन्तु में नहीं रहना चाहिए।

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दो कौड़ी के विज्ञापन के लिए रघुवर दास के आगे ताता-थैया करनेवाले अखबारों-चैनलों ने हेमन्त मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों की शैक्षिक योग्यता को बनाया मुद्दा

28 जनवरी को राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। आम तौर पर किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को यह उसका विशेषाधिकार होता है कि वह किसे मंत्री बनाये और किसे मंत्री  न बनाएं। इसमें मुख्यमंत्री अपने विवेक का इस्तेमाल करता है और कोई उसे चुनौती भी नहीं दे सकता, पर झारखण्ड में इस बार हेमन्त मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों की शैक्षिक योग्यता मुद्दा बन गई है और इसे मुद्दा बनाया हैं,

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अगर करीमन, मियां न होकर दलित हिन्दू होता और कोई ब्राह्मण उसके शव को श्मशान में जलने नहीं देता, तो क्या होता?

अगर करीमन मियां, मियां न होकर दलित हिन्दू होता और कोई ब्राह्मण उसके शव को श्मशान में जलने नहीं देता, तो फिर क्या होता? निश्चय ही उस वक्त पूरे देश में आग लग जाती, पूरे ब्राह्मण समुदाय को लोग हिला कर रख देते, एनडीटीवी ही नहीं बल्कि पूरे चैनलों में ये खबर सुर्खियों में होती, कई सप्ताह तक इस पर विशेष चर्चाएं होती, अखबार वाले उस ब्राह्मण का जीना मुहाल कर देते, संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज होती, और वह ब्राह्मण जेल की सलाखों में होता।

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CM आवास में पिछले चार वर्षों से हर 28 दिसम्बर को मनाये जा रहे “रघुवर पर्व” पर हेमन्त ने लगाया ब्रेक

आज 28 दिसम्बर है, भला कौन भूल सकता है कि आज के दिन रघुवर दास के शासनकाल के दौरान राजधानी रांची में क्या होता था? या पूरे झारखण्ड में आज के दिन को कैसे सेलिब्रेट किया जाता था? मुख्यमंत्री आवास में किस प्रकार के आयोजन होते थे, यानी काम-धाम कुछ नहीं और जनता के सामने ढिंढोरा खूब पीटा जाता था कि रघुवर सरकार ने ये किया, रघुवर सरकार ने वो किया,

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रघुवर सरकार की करारी हार से अखबारों-चैनलों को लगा करारा झटका, जनता की गाढ़ी कमाई गई बच

अपने प्रचार-प्रसार के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहानेवाली रघुवर सरकार ने 24 दिसम्बर के लिए राज्य के सारे अखबारों को विशेष विज्ञापन देने की वह भी जैकेट की तैयारी कर ली थी, पर उसकी हुई करारी हार ने अखबारों व चैनलों को होनेवाली कमाई पर पानी फेर दिया, तथा इनके मालिकों और संपादकों को भी भारी नुकसान पहुंचा दिया।

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जनादेश के माध्यम से झारखण्ड की जनता ने रघुवर भक्त अखबारों-चैनलों को भी चेताया, सुधरिये नहीं तो सिधारने के लिए तैयार रहिये…

झारखण्ड की जनता द्वारा हेमन्त सोरेन को दिये गये जनादेश स्पष्ट रुप से कह रहा है कि यह जनादेश केवल हेमन्त सोरेन को सरकार बनाने के लिए नहीं मिला, यह जनादेश उन सारे अखबारों-चैनलों के लिए भी हैं, जो राज्य के निवर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रति अपनी भक्ति दिखा रहे थे, उन पर श्रद्धा लूटा रहे थे।अखबारों और चैनलों ने जिस प्रकार से पांच सालों तक रघुवर भक्ति की है,

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हिन्दुस्तान को छोड़ सभी अखबारों-चैनलों ने CM रघुवर के आगे घूटने टेके, नहीं छापी CM रघुवर के खिलाफ की गई थाने में शिकायत की रिपोर्ट

यह नया झारखण्ड है। यहां आम जनता और विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ होनेवाली थानों में शिकायतों व प्राथमिकियों की खबरें प्रथम पृष्ठ पर वह भी बड़े-बड़े अक्षरों में विशेष स्थान देकर छापी जाती हैं। चैनलों में उसे प्रमुखता से उनकी खबरों को जैसे बाल का खाल निकाला जाता हैं, उस प्रकार से दिखाई जाती हैं, पर जैसे ही मुख्यमंत्री रघुवर दास की बात आती हैं।

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नोट पकड़ो और बाइक के साथ जन आशीर्वाद यात्रा में शामिल हो और बोलो अबकी बार 65 पार

लीजिये, जब जन आशीर्वाद यात्रा में भीड़ नहीं जुटी तो भाजपा नेताओं ने पैसों का सहारा लिया, खुब जमकर दोनों हाथों से रुपये लूटाए गये तथा रुपयों के खातिर सब कुछ करनेवालों ने इसका जमकर रसास्वादन किया तथा बेइमानी के रास्ते, बेइमानी के कार्यों में भी शत प्रतिशत ईमानदारी दिखाई तथा बाइक लेकर मुख्यमंत्री के जन-आशीर्वाद यात्रा में खुद को शरीक किया।

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