याद रखें, उनके लिए भारतीय स्वतंत्रता दिवस कम, विज्ञापनोत्सव ज्यादा हैं…

जो चरित्रवान होते हैं, वे देश बनाते हैं और जो चरित्रहीन होते हैं, वे चूहे की तरह देश कुतर रहे होते हैं, फैसला आपके हाथ में, किधर हैं आप? सच पूछिये, तो अपने देश में 15 अगस्त का दिन, स्वतंत्रता दिवस मनाने का दिन न होकर विज्ञापनोत्सव का दिन होता है। बेकार की बातों के बीच, अखबारों और चैनलों में देश को चूहे की तरह कुतर रहे नेताओं-पत्रकारों-अधिकारियों-पुलिसकर्मियों-ठेकेदारों-अभियंताओं-अधिवक्ताओं के आलेख और अनाप-शनाप विज्ञापनों की ठेलम-ठेल इस दिन रहती है।

स्वतंत्रता दिवस आने के पहले से ही विज्ञापनोत्सव की तैयारी में लग जाते है मीडियाहाउस के लोग

स्थिति ऐसी होती है कि ये अखबार वाले स्वतंत्रता दिवस के दिन अखबारों में जगह नहीं होने के कारण वे स्वतंत्रता दिवस के बाद के दिनों में भी बेमतलब के विज्ञापनों के माध्यम से आम जनता को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं और बधाइयां देते रहते है और संबंधित व्यक्ति और विभाग से उसका भुगतान उनके सर पर चढ़कर करा लेते है और विज्ञापन नहीं मिलने पर उन्हें छठी रात का दूध याद दिला देते है, उनके खिलाफ अनाप-शनाप समाचार छापकर। बेचारा इसी चक्कर में विभागीय अधिकारी, भयाक्रांत होकर, अखबारों/चैनलों के संवाददाताओं को अपने कार्यालय में बुलाकर गणेश परिक्रमा करते हुए, मनोवांछित राशि का विज्ञापन प्रदान करते हैं, ताकि वे शनि-राहु-केतु रुपी पत्रकार के भय से मुक्त होकर अपना कार्य सही ढंग से निबटा सकें।

कई पुलिसकर्मी डरते है पत्रकारों से, पर कई उलटा टांगने का भी प्रबंध कर देते हैं

कई थाना प्रभारी या पुलिस अधिकारी तो अपने चहेते टुटपूंजियों को मुंहमांगी रकम देकर, स्वतंत्रता दिवस की बधाई का विज्ञापन अखबार में छपवाते है, ताकि शनि रुपी पत्रकारों की कृपा दृष्टि बनी रहे, पर जहां कुछ दबंग पुलिसकर्मी होते है, वहां ये उल्टे इन शनि-राहु-केतु टाइप के पत्रकारों को उलटा टांग देने का ऐसा भय दिखाते है, कि उन थाना प्रभारियों के भय से इनकी नानी-दादी याद आती रहती है। आप आज ही का रांची से प्रकाशित कोई भी अखबार देख लीजिये, आपको बेतलब का आलेख, जो सच्चाई से कोसो दूर होता है, सिवाय पृष्ठ भरने के लिए छापे गये है, ताकि विज्ञापनों को छापने से कुछ पेज बच जाये तो उसकी पूर्ति आलेख को कांट-छाटकर कर ली जाये।

इस विज्ञापनोत्सव में सारे मीडिया हाउस बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं, मुफ्फस्सिल संवाददाताओं की नींद हो जाती हैं हराम

इस विज्ञापनोत्सव में आप किसी एक अखबार को कटघरे में नहीं रख सकते, ये तो सारे मीडियाहाउसों का महोत्सव हैं, जिसमें वे गोता लगाकर, अपने मुफ्सस्सिल संवाददाताओं का नींद हराम कर देते है, यह कहकर यार कि तुमने अखबार से सालों भर कमाया और साल में कम से कम एक-दो दिन भी तो अपने इलाके की कमाई, यानी नेताओं और अधिकारियों का गर्दन दबाओ ताकि मीडिया हाउसों का विज्ञापनोत्सव खुब धूम-धाम से मनाया जाये।

विज्ञापनोत्सव में केन्द्र व राज्य सरकार का भी मिलता है सहयोग

इस विज्ञापनोत्सव में राज्य व केन्द्र सरकार प्रमुख भूमिका निभाती है, और फिर उसके बाद शुरु होता है, केन्द्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रमुख कार्यालय, जहां से सुनिश्चित होता है कि वहां से विज्ञापन आयेगा। राज्य और केन्द्र सरकार अपनी जनता को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देती है, जिस बधाई से आम जनता को कुछ लेना-देना नहीं होता, पर हां इससे मीडिया हाउसों के चेहरे अवश्य खिल जाते है, और जिस जनता के पैसे से इन मीडिया हाउसों को करोड़ों की कमाई होती है, उनके चेहरे और गाल और चिपक जाते है, आंखें धंस जाती है, सांस फूलने लगती है, क्योंकि विकास का बयार उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर देता है।

नमूनों का समूह, विज्ञापनोत्सव के दिन विज्ञापन के माध्यम से जनता को खुब सब्जबाग दिखाता हैं

नमूनों का समूह, इन चिपके गालों, धंसे आंखों तथा कांटे की तरह सूखी लकड़ियों की तरह कांपते जनसमूहों को गरीबी, संप्रदायवाद, अशिक्षा, उग्रवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार से देश को बचाने की बात करता है और कहता है कि वह विकास करके रहेगा, चाहे उसे अपने परिवार को स्विटजरलैंड या हॉलैंड में बसाने पर मजबूर क्यों न हो जाना पड़े? पर वह करके रहेगा, क्योंकि वह नमूना है।  तो बहनों और भाइयों, विज्ञापनोत्सव दिवस पर आप सबको मेरी ओर से बहुत-बहुत बधाई, अखबार और चैनल देखिये तथा नयनाभिराम विज्ञापनों से अपना मनोरंजन करिये, ऐसे भी आज छुट्टी का दिन हैं, करना क्या है?  मस्ती करिये, देश आज 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, इसी तरह कल 72वां और पता नहीं कितना स्वतंत्रता दिवस आयेगा और हम इसी प्रकार विज्ञापनोत्सव का आनन्द लेते रहेंगे, उनलोगों के सौजन्य से, जिन्हें अपनी ब्रांडिंग के लिए विज्ञापन में ही सारा सुख-चैन समाया होता है, क्यों कैसी रही…

One thought on “याद रखें, उनके लिए भारतीय स्वतंत्रता दिवस कम, विज्ञापनोत्सव ज्यादा हैं…

  • August 16, 2017 at 3:15 pm
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    सही कहा अपने सर , एक न्यूज़ चैनल विगत कई महीनो से नहीं आ रहा था एकाएक १३ अगस्त हो चालू हो गया और फिर १६ अगस्त को बंद हो गया

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