महागठबंधन के आगे ‘65 पार’, ‘घर-घर रघुवर’,और अब ‘झारखण्ड पुकारा भाजपा दोबारा’ नारा भी फेल, अब केवल ‘मोदी’ नाम सहारा

आखिर ये भाजपा के साथ हो क्या रहा है? लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अतिउत्साहित भाजपा को झटके पर झटके लग रहे हैं, एक नारा ठीक से भाजपा कार्यकर्ताओं के जुबां पर आ भी नहीं पाता कि दुसरा लाइन में लग जा रहा हैं, राजनीतिक पंडितों की मानें तो इन सब का कारण भाजपा की लोकप्रियता में लगातार हो रही ह्रास है, युवाओं में दिन-प्रतिदिन भाजपा के प्रति बढ़ता गुस्सा है तथा जनता में रघुवर दास के प्रति बढ़ता अविश्वास है तो दूसरी तरफ महागठबंधन की ओर से सीएम पद के लिए घोषित उम्मीदवार हेमन्त सोरेन के प्रति जनता का बढ़ता प्रेम व विश्वास है।

राजनीतिक पंडितो की मानें तो आप आम जनता को एक बार धोखे में रख सकते हैं, बार-बार नहीं। अबकी बार 65 पार और घर-घर रघुवर के नारे इस प्रकार भाजपा कार्यकर्ताओं के सिर पर थोपे जा रहे थे, जैसे लगता था, कि राज्य में रघुवर दास बहुत ही लोकप्रिय हैं, जबकि ऐसा कभी था ही नहीं, जितने रघुवर दास अलोकप्रिय हैं, उतना भाजपा का कोई नेता नहीं, खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास के फेसबुक पेज को देखिये तो आपकी सारी गलतफहमी दूर हो जायेगी कि ये कितने लोकप्रिय है।

फिर भी एक मंत्री, जिसे इस बार टिकट काटी जा रही थी, उस पर दबाव डाला गया कि वो घर-घर रघुवर अभियान को रांची में चलाएं, बेचारा क्या करता था, हाथ में पर्चा लिया और घर-घर रघुवर अभियान चलाने लगा, क्योंकि उसे टिकट की ज्यादा चिन्ता थी, जबकि इसी राज्य में एक ऐसा मंत्री भी था, जिसने इस अभियान की ही हवा निकाल दी तथा व्यक्तिवाद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिनका नाम है –सरयू राय और जो सीएम के आगे घूटने टेक दिये, दंडवत् किया, उनका नाम है –सीपी सिंह।

चूंकि रघुवर दास को भी इस बात की जानकारी है कि वे राज्य में कितना लोकप्रिय है, इसलिए उन्होंने राज्य में भाजपा को ज्यादा से ज्यादा सीटें मिले, इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी या अमित शाह पर कम और यौन शोषण, हत्या व दवा घोटालों के आरोपियों तथा दलबदलूओं पर ज्यादा भरोसा किया ताकि जिन इलाकों में भाजपा कभी जीती नहीं,  उन इलाकों में इन महाभ्रष्ट लोगों व आतताइयों के कारण भाजपा को सीट दिला सकें और यहीं इनकी पूरे राज्य में हार का कारण बन गई और जो बची खुची इज्जत थी, वो इन्हीं के कैबिनेट मंत्री सरयू राय ने निकाल दिया।

जब उन्होंने जमशेदपुर पूर्व से निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में पर्चा भर दिया, स्थिति ऐसी है कि जमशेदपुर से खुद सीएम रघुवर का जीत पाना मुश्किल हो रहा है। तभी तो उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि वे अपने इलाके में पांच दिन स्पेशल गुजारेंगे, यानी खुद को लोकप्रिय बतानेवाले मुख्यमंत्री का ये हाल है कि उसे अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अभी से हाथ-पांव फूलने लगे है। ऐसे भी अगर ये हारते हैं तो कोई आश्चर्य नहीं, क्योंकि यहां कई मुख्यमंत्री पद को सुशोभित करनेवाले लोगों को यहां की जनता हार का स्वाद चखा चुकी है, इसलिए अगर रघुवर दास हारते हैं तो इसमें किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

सूत्र बताते हैं कि यही कारण रहा कि चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होने के पूर्व इस राज्य के सभी अखबारों के सम्पादकीय पृष्ठों को मुंहमांगी विज्ञापनों व चैनलों के कई स्लॉटों को मुंहमांगी रकम देकर खरीदा गया तथा इनके मालिकों व संपादकों को सरकार द्वारा मानसिक रुप से गुलाम बना दिया गया, यहीं कारण रहा कि जनता भले ही घर-घर रघुवर न बोले, पर ये चैनल व अखबार जमकर बोले, ये आज भी बोलने की कोशिश से बाज नहीं आ रहे।

पर आश्चर्य है कि खुद सीएम के फेसबुक पेज पर जनता तथा युवाओं का गुस्सा इस प्रकार दिखाई दे रहा है कि राजनीतिक पंडित भी आश्चर्य है, जरा देखिये न, पूरे झारखण्ड के विभिन्न मुख्य मार्गों पर होर्डिंग लगाया गया है, होर्डिंग में साफ लिखा है कि “जब झारखण्ड के साथ है मोदी, तो किसी और के बारे में क्या सोचना, मेरा वोट भाजपा को, झारखण्ड पुकारा भाजपा दोबारा” यानी मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास कह रहे है कि भाई छोड़ों हमको, पीएम मोदी को देखो, तो क्या यहां की जनता मूर्ख है, कि हर बार मोदी को देखकर वोट कर, फिर से हाथी उड़ानेवालों को अपने माथे पर बिठा लेगी कि कोई दुसरा विकल्प तलाशेगी। शायद यही कारण है कि जनता पूछ रही है, सीएम से सवाल पर सीएम रघुवर का जनता के सवालों का जवाब देने के लिए वक्त नहीं, राजनीतिक पंडित तो कहते है कि जब जवाब ही नहीं तो वक्त कहां से आयेगा?

कृष्ण एन मिश्र कहते है – जाइये अब और सो जाइये … के। मनीष ओहदार कहते है – जाने दे उनको, आप अपना बताओ क्या किया और क्या करना रह गया, जब विकास हो गया फिर क्या रह गया करने को। कमलेश पासवान कहते है – तुम सरयू राय से हार रहे हो, अपनी सीट बचाओ … के। उभय बर्णवाल – मैं बीजेपी सरकार से खुश हूं पर पुरा नहीं, आज मुझे अपना बिजनेस करना है, पर सहयोग मुद्रा लोन आज तक नहीं मिला। अवध शर्मा तो गुस्से में कहते है कि कब लूटा है जेएमएम होश में रहकर बात कीजिये। … झारखण्ड में सबसे ज्यादा बीजेपी की सरकार रहा है, सबसे ज्यादा बीजेपी ने लूटा है और रघुवर दास … है। कमलेश पासवान – तुम जा रहे हो रघु भाई, तुमने सबको बेरोजगार किया है। यानी कुल मिलाकर देखें तो सीएम रघुवर दास के खिलाफ लोगों में इतना गुस्सा भरा हुआ है कि भाजपा के लिए सम्मानजनक सीट ला पाना भी इस बार मुश्किल सा दीख रहा है।

खुद भाजपा में ही कई ऐसे लोग हैं, जो इस बार के टिकट वितरण से इतने नाराज है कि ये विद्रोह की मुद्रा में हैं, कई जगहों पर भाजपा के खिलाफ भाजपा के कार्यकर्ता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, कई जगहों पर भाजपा के लोग दुसरे दलों से टिकट लेकर भाजपा के नाक में दमकर रखे हैं, कई जगहों पर भाजपा के लोगों ने चुप्पी साध ली है, उनका एक ही मकसद है भाजपा को हराओ, रघुवर को हटाओ, ऐसे में मोदी या शाह भी क्या कर लेंगे।

क्योंकि ऐसे में भाजपा को फिलहाल महागठबंधन से कम, अपने ही लोगों से ज्यादा खतरा हो गया हैं, और रही बात महागठबंधन की तो एक बात क्लियर है कि प्रथम चरण में जिन-जिन 13 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, वहां भाजपा की स्थिति इतनी कमजोर है कि आज तक ऐसी कमजोर स्थिति कभी नहीं हुई थी, और ले-देकर विभिन्न शहरों के व्यापारियों ने जो कि इनके परम्परागत वोट होते थे, इनके अंदर ही सेंध लगा दी और कई जगहों पर तो ये चुनाव भी लड़ रहे हैं, मकसद हम जीते या नहीं, पर हम तुम्हें हरा देंगे सनम। ऐसे में प्रथम चरण का चुनाव क्या संदेश दे रहा हैं, हमें लगता है कि किसी से पूछने की जरुरत नहीं, आप स्वयं समझदार हैं, समझते रहिये।